नई दिल्ली: बैंक अधिकारियों के भरोसे को हथियार बनाकर कंपनी के खाते से लाखों रुपये उड़ाने वाले कथित ठगों के गिरोह का केंद्रीय जिला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद करने का दावा किया है। बरामद संपत्ति में लगभग 1500 ग्राम सोना, 101 सोने के सिक्के, सोने की चेन, कड़े, हार, अंगूठियां, झुमके, एक नई महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी और 2.37 लाख रुपये नकद शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से एक सात साल से अधिक समय से जाली मुद्रा के मामले में फरार घोषित अपराधी बताया गया है।
एक फोन कॉल, फर्जी ई-मेल और 22.56 लाख की चपत
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान मध्य जिला डीसीपी रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि एडिशनल डीसीपी प्रशांत चौधरी की निगरानी में कार्रवाई को अंजाम दिया गया। डीसीपी के अनुसार मामला बैंक ऑफ इंडिया की राजेंद्र प्लेस शाखा से जुड़ा है। पांच अगस्त 2026 को बैंक के एक अधिकारी को फोन कर एक व्यक्ति ने खुद को कॉरपोरेट कंपनी का निदेशक दीपक मल्होत्रा बताया। पहले एक करोड़ रुपये की सावधि जमा रसीद बनवाने और ब्याज दरों पर बातचीत कर उसने बैंक अधिकारियों का भरोसा जीतने की कोशिश की। इसके बाद आरोपी ने कंपनी की चेकबुक समाप्त होने का बहाना बनाया और ई-मेल के माध्यम से भुगतान करने का अनुरोध किया। कंपनी के आधिकारिक ई-मेल से मिलते-जुलते पते और फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर 22,56,922 रुपये दूसरे खाते में भेजने के निर्देश दिए गए। अनिवार्य दस्तावेजों की मांग पर कथित तौर पर जल्द भुगतान का दबाव बनाया गया। इसके बाद बैंक से आरटीजीएस के जरिये रकम स्थानांतरित हो गई। मामले में साइबर थाना केंद्रीय जिला में प्राथमिकी दर्ज की गई।
तकनीकी जांच ने खोला ठगी का राज
जांच में पता चला कि रकम पश्चिम बंगाल के एक बैंक खाते में भेजी गई थी जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था। फर्जी पहचान, मोबाइल नंबर और भ्रामक ई-मेल के कारण आरोपियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। पुलिस टीम ने दूरसंचार रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद गाजियाबाद के लोनी से विनय कुमार यादव (36) और नोएडा निवासी अनिल कुमार सहगल (65) को गिरफ्तार किया गया।
छह अन्य मामलों से भी जुड़े तार
पुलिस के मुताबिक जांच में गुरुग्राम, पलवल, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली और रोहिणी में दर्ज छह अन्य मामलों में भी इसी तरह की कार्यप्रणाली सामने आई है। इन मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी और एक मामले में 88 लाख रुपये के संभावित प्रयास का उल्लेख है। पुलिस को पश्चिम बंगाल और बिहार में सक्रिय अन्य सहयोगियों के संबंध में भी सुराग मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम से सोना खरीदते और नकदी निकालते थे। बरामद संपत्ति का मौजूदा और संबंधित मामलों से संबंध स्थापित करने के लिए जांच जारी है।
बैंक और कंपनियों के लिए चेतावनी
पुलिस ने बैंकों और कंपनियों को सलाह दी है कि बड़े भुगतान से पहले अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता से बैंक रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। जल्दबाजी या किसी अधिकारी के नाम पर बनाए गए दबाव में अनिवार्य दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज न करें। संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर दें।इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक कमलेश कुमार के साथ सहायक उपनिरीक्षक पंकज यादव, हेड कांस्टेबल मनवीर सिंह, हेड कांस्टेबल शमीम, कांस्टेबल नितिन, महिला हेड कांस्टेबल सुनीता और महिला कांस्टेबल ललिता की टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम ने साइबर थाना प्रभारी योगराज दलाल की निगरानी तथा सहायक पुलिस आयुक्त पहाड़गंज शौरभ ए. नरेंद्र के समग्र पर्यवेक्षण में जांच की। पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के अनुसार तकनीकी जांच और समन्वित कार्रवाई से आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। पुलिस अब बरामद संपत्ति के स्रोत और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
Reported by- Pankaj Rai












