नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करीब 43 महीने बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। बुधवार, 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई ने इसे 0.25 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया। इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। इस फैसले का असर बैंक से कर्ज लेने वाले लोगों की जेब पर पड़ सकता है। खासकर होम लोन और ऑटो लोन की EMI बढ़ने की संभावना है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिनों तक चली MPC बैठक के बाद ब्याज दरों से जुड़े फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महंगाई के दबाव को देखते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी।
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई जरूरत पड़ने पर बैंकों को पैसा देता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है और इसका असर ग्राहकों को मिलने वाले लोन पर भी दिखाई दे सकता है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है।
SDF और MSF में नहीं हुआ बदलाव
आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाने के साथ दूसरी प्रमुख ब्याज दरों को फिलहाल पहले के स्तर पर रखा है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) की दर 5.25 फीसदी और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) की दर 5.75 फीसदी पर बरकरार है।
#WATCH | RBI hikes policy repo rate by 25 basis point to 5.5% https://t.co/92jeQuC3wz
— ANI (@ANI) October 7, 2026
केंद्रीय बैंक ने अपने मौद्रिक नीति रुख में भी बदलाव किया है। रुख को न्यूट्रल से हटाकर सख्त किया गया है। इसका संकेत है कि महंगाई का दबाव जारी रहने पर आगे भी ब्याज दरों को लेकर सख्त फैसले लिए जा सकते हैं।
महंगाई बनी फैसले की बड़ी वजह
आरबीआई के मुताबिक घरेलू और वैश्विक स्तर पर बने दबाव ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। ईंधन की कीमतों और खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी ने स्थिति को प्रभावित किया है। अगस्त में खुदरा महंगाई का अनुमान 4.8 फीसदी रहा, जो जुलाई के 4.50 फीसदी के अनुमान से ज्यादा है। हालांकि, विकास दर को लेकर केंद्रीय बैंक का अनुमान सकारात्मक है। चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। दूसरी तिमाही के लिए 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है।











