कोर्ट से बचते रहे तीन ‘भगोड़े’ खाकी ने बिछाया जाल तो एक साथ आया पूरा कुनबा

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नई दिल्ली: राजधानी में कानून की पकड़ से बचकर लंबे समय तक फरार रहना तीन आरोपियों को भारी पड़ गया। महिला अपराध से जुड़े एक मामले में सुनवाई से लगातार बच रहे तीन आरोपियों को अदालत ने घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। इसके बाद द्वारका जिला पुलिस की एंटी-जेल बेल एवं घोषित अपराधी सेल ने उनकी तलाश तेज कर दी। आखिरकार पुलिस को पुख्ता सूचना मिली और महावीर एन्क्लेव में छिपकर रह रहे तीनों आरोपियों को एक साथ दबोच लिया गया। द्वारका जिला डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बलराम मेहतो (49), पंकज (30) और बृज किशोर (42) के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ थाना डाबड़ी में दर्ज एफआईआर संख्या 331/2022 में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। अदालत में सुनवाई के दौरान लगातार गैरहाजिर रहने के कारण तीनों को 26 फरवरी 2026 को द्वारका कोर्ट की माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री शुभी गुप्ता की अदालत द्वारा घोषित अपराधी घोषित किया गया था।

गुप्त सूचना ने खोला ठिकाने का राज

द्वारका जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर घोषित अपराधियों और सक्रिय बदमाशों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी कड़ी में 18 सितंबर 2026 को पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली कि घोषित अपराधी बलराम मेहतो उसका बेटा पंकज और बृज किशोर डाबड़ी के महावीर एन्क्लेव इलाके में छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही टीम ने बिना समय गंवाए इलाके में पहुंचकर घेराबंदी की और रणनीति के तहत जाल बिछाया। पुलिस की कार्रवाई इतनी सटीक रही कि तीनों आरोपियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीम ने तीनों को सफलतापूर्वक पकड़ लिया। पुलिस ने तीनों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35.1(डी) के तहत गिरफ्तार किया।

तीनों की एक ही ठिकाने से गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार बलराम मेहतो पुत्र गंगाधर मेहतो सिंह, उम्र 49 वर्ष, 40 फीटा रोड, महावीर एन्क्लेव पार्ट-2, दिल्ली का रहने वाला है। दूसरा आरोपी पंकज पुत्र बलराम मेहतो, उम्र 30 वर्ष, भी इसी पते पर रहता है। तीसरा आरोपी बृज किशोर पुत्र मोहन मेहतो, उम्र 42 वर्ष, 40 फुटा रोड, महावीर एन्क्लेव पार्ट-2, डाबड़ी, दिल्ली का निवासी है। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपियों का पूर्व में कोई आपराधिक संलिप्तता रिकॉर्ड नहीं मिला है। इसके बावजूद संबंधित मामले में अदालत की कार्यवाही से बचने के कारण उन्हें घोषित अपराधी घोषित किया गया था।

इनकी रणनीति के आगे टूटी फरारी की ‘स्क्रिप्ट’

द्वारका जिला पुलिस के मुताबिक घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर विशेष टीम लगातार ऐसे आरोपियों की तलाश कर रही थी जो अदालत की प्रक्रिया से बचने के लिए अपने ठिकाने बदलते रहते हैं। इस मामले में भी पुलिस ने तकनीकी एवं मानवीय सूचना के आधार पर आरोपी की मौजूदगी की पुष्टि की और उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। इस पूरी कार्रवाई में इंस्पेक्टर हरीश कुमार के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल राहुल यादव नंबर 532/डीडब्ल्यू और हेड कांस्टेबल कुलवंत नंबर 681/डीडब्ल्यू की टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम ने एसीपी ऑपरेशंस द्वारका सुभाष मलिक की करीबी निगरानी में कार्रवाई को अंजाम दिया।यह अभियान द्वारका जिला पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह के निर्देश पर चलाया गया।

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