नई दिल्लीः धनतेरस के साथ ही दिवाली के त्योहार की शुरुआत हो जाती है। इस दिन लोग घर की साफ-सफाई करते हैं, नए बर्तन और सोने-चांदी की चीजें खरीदते हैं और शाम को मां लक्ष्मी तथा भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जा रही है। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस बार धनतेरस का महत्व और खास हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य बना रहता है। वहीं, भगवान धन्वंतरि की आराधना करके अच्छी सेहत की कामना भी की जाती है।
हिंदू धर्म में शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त मां लक्ष्मी से घर में बरकत, खुशहाली और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। वहीं, धनतेरस पर भी धन की देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में शुक्रवार और धनतेरस का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। धनतेरस पर शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:01 बजे से 7:57 बजे तक रहेगा। वहीं, प्रदोष काल शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक और वृषभ काल शाम 6:01 बजे से 7:57 बजे तक रहेगा।
इस विधि से करें मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा
धनतेरस पर पूजा शुरू करने से पहले घर और मंदिर की अच्छी तरह सफाई कर लें। पूजा स्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं। शाम को शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करके पूजा शुरू करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत, हल्दी, लाल फूल और कमल का फूल अर्पित करें। माता को फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं। फिर भगवान कुबेर को फूल और अक्षत चढ़ाएं। अंत में दोनों की आरती करें और घर के मुख्य दरवाजे के साथ पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।












