Diwali 2026: पांच दिनों तक चलेगा दिवाली का त्योहार, जानें धनतेरस से भाई दूज तक की पूरी तारीख

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नई दिल्ली: दिवाली हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे सिर्फ एक दिन नहीं हैं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला पर्व है जो की दिवाली के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे त्योहार आते हैं। इस साल यह पर्व 6 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर तक चलेगा। इन दिनों  लोग अपने घरों की साफ सफाई करते है और लाइट्स के साथ घरों में दीप जलाने व पूजा-पाठ करने और परिवार के साथ त्योहार मनाने की परंपरा होती है।

धनतेरस कब है?

पांच दिवसीय दिवाली पर्व की शुरुआत 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस से होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की पूजा करने की परंपरा है। धनतेरस के मौके पर सोना-चांदी, बर्तन, आभूषण और घर की उपयोगी नई चीजें खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होने की कामना की जाती है। इस दिन घर की साफ-सफाई कर दीप जलाने और मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां भी की जाती हैं।

नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली

7 नवंबर, शनिवार को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली से एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस पर्व का भी विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तेल और उबटन से स्नान करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है और शरीर में नई ऊर्जा पैदा होता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और कई स्थानों पर दीपक जलाए जाते हैं। कई परिवार इस दिन विशेष रूप से यम दीप भी जलाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस दिन घर की साफ-सफाई और सजावट भी की जाती है, ताकि अगले दिन होने वाले लक्ष्मी पूजन की तैयारियां पूरी की जा सकें।

दिवाली और लक्ष्मी पूजन

8 नवंबर, रविवार को मुख्य दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। दिवाली के दिन लोग सुबह से ही घर की साफ-सफाई करने लगते हैं और शाम को घर को दीयों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं। शाम के समय शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाता है। लोग मां लक्ष्मी से घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। पूजा के बाद परिवार के लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर दिवाली की शुभकामनाएं देते हैं।

दिवाली के दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए थे। इसी परंपरा से दिवाली को प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व भी माना जाता है। इस दिन घरों के साथ-साथ बाजार भी रोशनी और सजावट से जगमगा उठते हैं। लोग नए-नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और परिवार के साथ मिलकर त्योहार का आनंद लेते हैं।

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट

दिवाली के बाद 10 नवंबर, मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। ब्रज क्षेत्र समेत देश के कई हिस्सों में गोवर्धन पूजा को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को भारी बारिश और इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। और इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा की जाती है।

कई जगहों पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती है। इसके बाद भगवान कृष्ण को 56 भोग या अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाया जाता है। अन्नकूट में कई तरह के पकवान और सब्जियां शामिल की जाती हैं। मंदिरों में इस दिन विशेष सजावट और भोग का आयोजन भी किया जाता है।

भाई दूज और यम द्वितीया

पांच दिवसीय दिवाली पर्व का समापन 11 नवंबर, बुधवार को भाई दूज के साथ होगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका स्वागत किया और उन्हें भोजन कराया। तभी से भाई दूज पर भाई-बहन के प्रेम और स्नेह को विशेष महत्व दिया जाता है।

भाई दूज के दिन कई परिवारों में बहन के घर जाकर भोजन करने की परंपरा भी है। इस तरह यह पर्व दिवाली की खुशियों को परिवार और रिश्तों के साथ जोड़ते हुए पांच दिवसीय उत्सव का समापन करता है।

Diwali 2026 की तारीखें एक नजर में यह पे देखें 

धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार, नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली: 7 नवंबर 2026, शनिवार, दिवाली: 8 नवंबर 2026, रविवार, गोवर्धन पूजा/अन्नकूट: 10 नवंबर 2026, मंगलवार, भाई दूज: 11 नवंबर 2026, बुधवार पांच दिनों तक रहेगा त्योहार का उत्साह

दिवाली का पांच दिवसीय पर्व सिर्फ दीप जलाने और पूजा करने तक सीमित नहीं है। धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलने वाला यह उत्सव परिवार, परंपरा, आस्था और आपसी रिश्तों से जुड़ा हुआ है। इन पांच दिनों में घरों की साफ-सफाई से लेकर पूजा-पाठ, दीपदान, मिठाइयों और पारिवारिक मिलन तक अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। इस दौरान बाजारों में भी काफी रौनक देखने को मिलती है। लोग घर की सजावट के लिए दीये, रंगोली, लाइट्स और अन्य सामान खरीदते हैं। वहीं, दिवाली पर लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाकर मिठाइयां और उपहार देकर शुभकामनाएं भी देते हैं।

इस तरह Diwali 2026 का पांच दिवसीय पर्व 6 नवंबर से शुरू होकर 11 नवंबर को भाई दूज के साथ पूरा होगा। हर दिन की अपनी अलग मान्यता और परंपरा है, जो इस पूरे उत्सव को खास बनाती है।

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