'ऐसे लोगों को भगवान सद्बुद्धि दे' नाना पाटेकर और तनुश्री दत्ता विवाद पर बेटे मल्हार ने तोड़ी चुप्पी, माता-पिता के रिश्ते का खोला बड़ा राज

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नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के परिवार को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने कई अहम बातें साझा की हैं। उन्होंने परिवार के रिश्तों पर सवाल उठाने वालों को जवाब देने के साथ ही तनुश्री दत्ता से जुड़े पुराने विवाद पर भी अपनी बात रखी। मल्हार ने बताया कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज परिवार की असल जिंदगी को नहीं दर्शाती। उन्होंने अपने माता-पिता के रिश्ते, पिता के आखिरी समय और उनके कम फिल्में करने की वजह पर भी खुलकर बात की।

दरअसल हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में मल्हार ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जिस मामले को बार-बार चर्चा में लाया जा रहा है, वह काफी पहले खत्म हो चुका है। उनके मुताबिक, अदालत की ओर से भी इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। इसके बावजूद लोग इस विषय को उठाते रहते हैं। मल्हार ने कहा कि वह ऐसे लोगों से कुछ नहीं कहना चाहते और उन्हें बस यही कहेंगे कि भगवान उनका भला करे।

माता-पिता के रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी

मल्हार ने अपने माता-पिता के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता के अलग होने के बावजूद उनके बीच अच्छे संबंध थे। उनका साथ करीब 39 साल का था। मल्हार के मुताबिक, परिवार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का मतलब यह नहीं है कि उनके बीच प्यार नहीं था। उन्होंने बताया कि परिवार भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है और उन्हें हमेशा अपनों का साथ मिला।

आखिरी समय में अकेले नहीं थे नाना

मल्हार ने 8 अक्टूबर की घटना को याद करते हुए बताया कि उनके पिता गोवा में थे। बेचैनी महसूस होने पर नाना ने पहले मैसेज किया और फिर फोन किया। परिवार के सदस्य उनके पास पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मल्हार उस समय पुणे में थे। सुबह करीब पांच बजे मां का फोन आने के बाद उनकी दुनिया जैसे थम गई। उन्होंने यह भी कहा कि नाना अकेले नहीं थे और परिवार का कोई न कोई सदस्य हमेशा उनके साथ रहता था। वह रोजाना करीब ढाई घंटे वर्कआउट भी करते थे।

क्यों कम फिल्में कर रहे थे नाना पाटेकर?

मल्हार के मुताबिक, नाना एक जैसे किरदार निभाकर ऊब गए थे। वह अपनी कहानियां बनाना चाहते थे और अभिनय में लगातार कुछ नया करना चाहते थे। उनकी कोशिश थी कि बिना लंबे-चौड़े संवाद बोले भी दमदार अभिनय किया जा सकता है।

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