सावन का पहला सोमवार: जलाभिषेक का सुबह का समय निकल गया? जानिए आज के बाकी शुभ मुहूर्त

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Sawan First Somwar 2026
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नई दिल्ली: आज सावन का पहला सोमवार है, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखने, जलाभिषेक करने और भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं. इस बार पहले सावन सोमवार पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन किए गए पूजा-पाठ और उपायों का महत्व और भी बढ़ गया है. यदि आप भी भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो सही समय पर पूजा और जलाभिषेक करना बेहद शुभ माना जाएगा.

सावन सोमवार पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, पहले सावन सोमवार पर पूजा के लिए कई शुभ समय उपलब्ध हैं. 
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:11 बजे से 5:33 बजे तक 

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:19 बजे से 1:10 बजे तक

संध्या पूजा मुहूर्त- शाम 7:13 बजे से रात 8:20 बजे तक

वहीं, सुबह 7:53 बजे से 9:30 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस अवधि में पूजा या जलाभिषेक करने से बचना चाहिए.

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद घर या मंदिर में दीपक जलाकर व्रत और पूजा का संकल्प लें. शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, शक्कर और पंचामृत से अभिषेक करें. पूजा में बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद पुष्प और भस्म अर्पित करना शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. अंत में शिव चालीसा का पाठ, आरती और फल या मिठाई का भोग लगाकर पूजा पूरी करें.

आर्थिक उन्नति और करियर के लिए उपाय

यदि आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं, तो शिवलिंग पर 21 बेलपत्रों पर चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर अर्पित करें. इसके साथ पांच शमी के पत्ते चढ़ाएं और गन्ने के रस से अभिषेक करें. मान्यता है कि इससे धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं. नौकरी और करियर में सफलता पाने के लिए जल में थोड़ा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें. साथ ही बिना टूटे 21 चावल के दाने चढ़ाएं. यह उपाय कार्यक्षेत्र में आने वाली रुकावटों को दूर करने वाला माना जाता है.

विवाह और स्वास्थ्य के लिए करें ये उपाय

यदि विवाह में देरी हो रही है या मनचाहा जीवनसाथी चाहते हैं, तो जल में केसर और कच्चा दूध मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें. इसके बाद माता पार्वती को सिंदूर और सुहाग की सामग्री अर्पित करें. वहीं अच्छे स्वास्थ्य और रोगों से राहत की कामना के लिए तांबे के लोटे में गंगाजल मिलाकर महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. पूजा के अंत में शहद और इत्र अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

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