कोलकाता: पश्चिम बंगाल में इन दिनों राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म है। एक बागी सांसद के बयान के बाद चर्चा छिड़ गई कि तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले कई सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। दावा किया गया कि करीब 17 सांसद जल्द भाजपा का दामन थाम लेंगे। लेकिन भाजपा ने इन अफवाहों पर पानी फेर दिया है। पार्टी ने साफ कह दिया कि फिलहाल किसी को भी अपने में शामिल करने की कोई योजना नहीं है।
भाजपा का सख्त रुख
राज्य भाजपा के प्रभारी शमिक भट्टाचार्य ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ इसलिए किसी को नहीं लेगी क्योंकि वह आना चाहता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या बासुनिया जिस भाजपा की बात कर रहे हैं, वह मंगल ग्रह वाली पार्टी है? भट्टाचार्य ने साफ किया कि जहां तक उनकी जानकारी है, न तो तृणमूल और न ही एनसीपीआई से कोई भाजपा में आ रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य के लोग इन नेताओं द्वारा तृणमूल शासनकाल में किए गए अत्याचारों को नहीं भूले हैं।
बागी सांसदों का दावा और चुनाव का मौका
यह पूरा मामला राज्य में होने वाले निकाय चुनावों के आसपास गरमाया है। बागी सांसद जगदीशचंद्र बासुनिया ने दावा किया था कि दुर्गा पूजा के पहले या बाद में 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दल-बदल के आरोप से बचने के लिए यह फैसला लिया जा रहा है। वहीं काकोली घोष दस्तीदार जैसी वरिष्ठ बागी नेता ने गठबंधन की मांग की और कहा कि वे एनडीए के सबसे बड़े दल हैं, इसलिए चुनाव में साथ लड़ने की संभावना है।
कौन-कौन हैं ये बागी सांसद?
इन बागी सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीब बंदोपाध्याय, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय और अबू ताहेर जैसे करीब 20 नाम शामिल हैं। हालांकि तीन मुस्लिम सांसद पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे भाजपा में नहीं जाएंगे और सिर्फ एनडीए को समर्थन देंगे। भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने भी कहा कि बागी सांसद के बयान के लिए पार्टी जिम्मेदार नहीं है।
भाजपा का रुख साफ है कि वह अपने दम पर लड़ती है और किसी की कृपा या समझौते के बिना आगे बढ़ती है। ऐसे में ममता बनर्जी को छोड़ने वाले नेता अभी न तो तृणमूल में सहज हैं और न ही भाजपा में जगह पा रहे हैं।












