नई दिल्ली: राजधानी में साइबर अपराधियों के खिलाफ पश्चिम जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी लोन और छात्रवृत्ति दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर साइबर ठगी के उस पूरे तंत्र की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं, जिसमें फर्जी कॉलिंग नेटवर्क से लेकर बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम निकालने तक के लिए अलग-अलग लोग तैनात थे। पुलिस ने मौके से 12 स्मार्टफोन, 9 कीपैड मोबाइल फोन, पीड़ितों का ब्योरा रखने वाली नोटबुक और रजिस्टर सहित 45,170 रुपये नकद बरामद किए हैं। पांच महिला टेली-कॉलर्स को भी मामले में पाबंद किया गया है।
शिकायतों के सुराग से खुला ठगी का साम्राज्य
पश्चिम जिला पुलिस की साइबर थाना टीम NCRP और समन्वय पोर्टल पर दर्ज शिकायतों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही थी। इसी दौरान तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के लोगों को छात्रवृत्ति, लोन और आर्थिक सहायता दिलाने का लालच देकर रकम ऐंठने का मामला सामने आया। जांच में विकासपुरी स्थित कर्नाटक बैंक की एक शाखा का खाता तीन साइबर शिकायतों से जुड़ा मिला। बैंक खाते और उससे जुड़े सिम कार्ड की पड़ताल ने पुलिस को अमित कपूर तक पहुंचा दिया। इसके बाद साइबर थाना पश्चिम में एफआईआर संख्या 56/2026 के तहत बीएनएस की धाराओं 112(2), 318(4), 317(2), 61(2) और 3(5) में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने अमित कपूर, शिवा सिंह चौधरी और एस. गौरव उर्फ अप्पू को गिरफ्तार किया। जांच में अप्पू की भूमिका बैंक खाता उपलब्ध कराने वालों और कॉलिंग नेटवर्क के बीच संपर्क सूत्र के रूप में सामने आई।
विकासपुरी में छापेमारी कॉलिंग सेंटर का खुलासा
आगे मिले सुरागों के आधार पर पुलिस टीम ने विकासपुरी के बुधेला इलाके में छापा मारा। यहां पांच महिला टेली-कॉलर्स और सराज अंसारी उर्फ दाऊद समेत छह लोग मिले। जांच में सराज इस संदिग्ध कॉलिंग ठिकाने का संचालन करता पाया गया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पांच महिला टेली-कॉलर्स को भी मामले में पाबंद किया गया।
ऐसे बिछाते थे ठगी का जाल
जांच के अनुसार गिरोह के सदस्य बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे। कॉलिंग नेटवर्क के जरिए लोगों को लोन, छात्रवृत्ति और दूसरी सरकारी-गैरसरकारी आर्थिक योजनाओं का झांसा दिया जाता था। पीड़ितों से बैंक खाते यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड के माध्यम से रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद एटीएम समेत विभिन्न माध्यमों से नकदी निकालकर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी। इस पूरे खेल में कमीशन का बंटवारा भी होता था।
पुलिस टीम की कार्रवाई, जांच का दायरा बढ़ा
छापेमारी में 21 मोबाइल फोन, 10 नोटपैड, पांच रजिस्टर, एक डेबिट कार्ड, दो चेकबुक और 45,170 रुपये नकद बरामद हुए। दस्तावेजों में ग्राहकों और संभावित पीड़ितों का विवरण मिला है। इस कार्रवाई में एसआई योगेश, एसआई अरविंद, हेड कांस्टेबल पवन, हेड कांस्टेबल नरेश और कांस्टेबल सुरेंद्र शामिल रहे। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर विकास कुमार बुलडक, एसएचओ साइबर थाना पश्चिम ने किया। एसीपी ऑपरेशंस राजेश कुमार की निगरानी तथा डीसीपी पश्चिम जिला हरेश्वर वी. स्वामी, आईपीएस के समग्र पर्यवेक्षण में यह अभियान चलाया गया। पुलिस अब बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और पीड़ितों की पहचान में जुटी है। मामले में आगे की जांच जारी है।
Reported By: Pankaj Rai












