नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लागू अस्थायी पाबंदियों के पीछे की वजह स्पष्ट की है। पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन नई दिल्ली में संवैधानिक संस्थानों, आम नागरिकों, कारोबारियों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है।
एडिशनल सीपी पीआरओ राजीव रंजन ने बताया कि।जुलाई में जंतर-मंतर पर एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति मिलने के बावजूद धरना लगभग एक महीने तक जारी रहा। पुलिस के मुताबिक इस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और हिंसक घटनाओं में निर्दोष विद्यार्थियों को भी चोटें आईं। पिछले सप्ताह प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं को भी पुलिस ने गंभीर चिंता का विषय बताया है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर एक समय में लगभग एक हजार लोगों के सुरक्षित रूप से जुटने की क्षमता है। ऐसे में भीड़ का आकार, आपातकालीन रास्ते, यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा ध्यान में रखना आवश्यक है। प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए सीजेपी द्वारा आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है। पुलिस ने आयोजकों से कानून का पालन करने और प्रतिभागियों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने की अपील की है। उच्चतम न्यायालय द्वारा भी सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े कानूनी नियमों के पालन के महत्व पर जोर दिए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रतिबंध अस्थायी और एहतियाती हैं। उद्देश्य किसी की आवाज दबाना नहीं, बल्कि भीड़ नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।












