नई दिल्ली: भारतीय जनसंघ के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने जनसंघ की ऐतिहासिक यात्रा, राष्ट्रवादी विचारधारा और लाखों कार्यकर्ताओं के त्याग एवं समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा प्रज्वलित विचारों की ज्योति आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में देशव्यापी जनआंदोलन बन चुकी है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने के उद्देश्य से हुई थी। डॉ. मुखर्जी का नारा एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे” आज भी राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा देता है।
छोटी शुरुआत, बड़ा संकल्प
उन्होंने जनसंघ के शुरुआती चुनावी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसदीय संख्या के बावजूद संगठन ने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय का दर्शन संगठन की वैचारिक नींव बने। आपातकाल के दौरान कार्यकर्ताओं के संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिए गए योगदान को भी उन्होंने नमन किया।
वर्ष 1977 में जनता पार्टी के गठन और बाद में वैचारिक मतभेदों के चलते राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। दो सांसदों से शुरू हुई यात्रा आगे बढ़ते हुए 2014 में पूर्ण बहुमत और 2019 तथा 2024 में लगातार जनादेश तक पहुंची।
जनसंघ के सपनों से विकसित भारत का संकल्प
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को जनसंघ की वैचारिक यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि संगठन की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से नई पीढ़ी को संघर्ष और बलिदान की गाथा सुनाने का आह्वान किया। साथ ही 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए सेवा, सुशासन और राष्ट्रहित के संकल्प को आगे बढ़ाने की अपील की।
Reported By: Pankaj Rai












