नई दिल्ली: बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने पश्चिम बंगाल में होने वाली दुर्गा पूजा को लेकर एक बयान दिया है. हावड़ा में आयोजित हनुमान कथा कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास खान-पान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व के दौरान पंडालों के पीछे नॉन-वेज खाना बनाए जाने की बात उन्हें पसंद नहीं है.
पंडाल के पीछे खाना बनाने पर जताई आपत्ति
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बंगाल में नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान बड़े स्तर पर पंडाल लगाए जाते हैं. उनके मुताबिक, कुछ जगहों पर पंडाल के पीछे या तख्त के नीचे मांसाहारी भोजन और अन्य तरह का खाना बनाया जाता है.
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन के आसपास इस तरह की गतिविधियां उन्हें अच्छी नहीं लगती. उन्होंने लोगों से अपील की कि नवरात्रि के दौरान ऐसे लोगों से दूरी बनाएं और उनका बहिष्कार करे.
‘धार्मिक होने का दावा करने वाले सोचें’
अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिकता को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को धार्मिक बताते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा जैसे आयोजन के दौरान पंडाल के पीछे इस तरह का भोजन बनाते हैं, उनके आचरण पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने ऐसे लोगों को लेकर कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें पाखंडी बताया और बंगाल के लोगों से नवरात्रि के दौरान जागरूक रहने की अपील की.
बंगाल में भव्य तरीके से होती है दुर्गा पूजा
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा सबसे प्रमुख त्योहारों में शामिल है. कोलकाता और राज्य के दूसरे हिस्सों में हर साल बड़े-बड़े पंडाल बनाए जाते हैं और लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
इसी धार्मिक आयोजन को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने पंडालों के आसपास मांसाहारी भोजन बनाए जाने पर अपनी आपत्ति सामने रखी है. उनका यह बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है. उनके समर्थक इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि इस तरह के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं.












