घर से शुरू किया नोटबुक का काम, आज सालाना सात लाख का कारोबार और महिलाओं को रोजगार

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रतिया: कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली रताखेड़ा गांव की नेहा रानी आज अपने पैरों पर खड़ी हैं। पढ़ी-लिखी होने के बावजूद रोजगार का अवसर नहीं मिलने से वह घर के कामों तक सीमित थीं। परिवार की आय खेती पर निर्भर थी और सीमित आमदनी में सात सदस्यों वाले परिवार का गुजारा आसान नहीं था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद नेहा ने अपनी मेहनत और हुनर को नई दिशा दी। घर से शुरू किया गया नोटबुक बनाने का छोटा-सा काम आज कारोबार का रूप ले चुका है। अब वह न केवल सालाना करीब 7 लाख रुपये का कारोबार कर रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी पार्ट टाइम रोजगार दे रही हैं।

समूह से जुड़ने के बाद मिली नई राह

रताखेड़ा गांव निवासी नेहा रानी पत्नी सुशील कुमार के परिवार में सात सदस्य हैं। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से पति की खेती से चलती थी। नेहा पढ़ी-लिखी थीं और चाहती थीं कि वह खुद आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दें, लेकिन उनके अनुकूल कोई काम नहीं मिल पा रहा था।

फरवरी 2023 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की फील्ड टीम गांव पहुंची और महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए प्रेरित किया। नेहा को लगा कि समूह के माध्यम से वह अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और 20 फरवरी 2023 को ‘हरमन महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। समूह की महिलाओं ने उनके पढ़े-लिखे होने, व्यवहार और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सदस्य बनाया।

नोटबुक बनाने के हुनर को बनाया कारोबार

समूह से जुड़ने के बाद मिशन के स्टाफ ने नेहा को अपने रोजगार को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। नेहा ने बताया कि वह पहले से घर पर नोटबुक बनाने का काम करती थीं और इसे बड़े स्तर पर ले जाना चाहती थीं। इसके बाद मिशन की ओर से उन्हें आवश्यक सहयोग मिला और उन्होंने अपने काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाना शुरू किया।

नेहा ने 24 अगस्त 2024 को अपने घर में ही एक बड़ा कमरा तैयार करवाकर नोटबुक बनाने की मशीनें लगाईं। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर संगठन की ओर से करीब 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इस राशि से उन्होंने थोक में कच्चा माल खरीदा और विभिन्न स्कूलों के नाम की कॉपियां तैयार कर आसपास के स्कूलों में बेचनी शुरू कीं।

इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह की कॉपियां, डायरी और नोटपैड भी तैयार करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनका कारोबार आसपास के दुकानदारों तक पहुंचा और उन्होंने जिले में भी अपने उत्पादों की बिक्री शुरू कर दी।

कारोबार बढ़ा तो पति ने भी दिया साथ

शुरुआत में नेहा अकेले ही इस काम को आगे बढ़ा रही थीं। जब कारोबार में आमदनी होने लगी तो उनके पति सुशील कुमार की सोच भी बदली। वह नेहा के काम में रुचि लेने लगे और उनका साथ देना शुरू किया। अब सुशील ने खेती के साथ-साथ नोटबुक बनाने के कारोबार में पत्नी का हाथ बंटा रहे हैं।

कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए नेहा को बैंक के माध्यम से करीब 50 हजार रुपये का मुद्रा ऋण भी मिला। मेहनत रंग लाई और कारोबार लगातार बढ़ता गया। आज नेहा और उनके पति मिलकर इस काम से करीब 7 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। कारोबार शुरू करने के लिए लिया गया पैसा भी लगभग वापस किया जा चुका है।

रोजगार मांगने वाली नहीं, देने वाली बनीं नेहा

नेहा के लिए इस सफलता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि जिस रोजगार की तलाश वह कभी खुद कर रही थीं, आज वही रोजगार वह दूसरी महिलाओं को दे रही हैं। नोटबुक बनाने के काम में जुड़ी महिलाओं को वह पार्ट टाइम रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।

नेहा कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उन्हें लगता था कि माता-पिता ने उन्हें बीए तक पढ़ाया, लेकिन रोजगार का अवसर नहीं मिलने के कारण उनकी पढ़ाई का उपयोग नहीं हो पा रहा है। समूह और आजीविका मिशन से मिले सहयोग ने उनके सपनों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज उनकी पहचान केवल एक गृहिणी के रूप में नहीं, बल्कि एक सफल महिला उद्यमी के रूप में है।

समूह महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं

नेहा का कहना है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए बड़ा सहारा हैं। यदि महिलाएं समूह के माध्यम से मिलने वाले अवसरों को समझदारी और मेहनत के साथ अपनाएं तो वे अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं।

 महिलाओं में आत्मविश्वास जगाता है समूह: सुरेश कुमार

डीआरडीए के सीईओ सुरेश कुमार बताते है कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक मदद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास और अपनी पहचान बनाने का अवसर भी देते हैं। नेहा की कहानी इसका उदाहरण है कि यदि महिला को अवसर, सहयोग और अपने हुनर पर विश्वास हो तो वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल सकती है।

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