नई दिल्ली: वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के मानचित्र पर भारत अपनी स्थिति को तेजी से मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के कारण दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां अब चीन से निर्भरता घटाकर भारत को अपना नया मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। Apple के भारत में अपने उत्पादन आधार का विस्तार करने और Google के अपने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड डिवाइसेस का उत्पादन चीन से भारत स्थानांतरित करने की योजनाओं ने देश के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक मजबूत और महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा।
₹62,500 करोड़ की नई मैन्युफैक्चरिंग योजना
केंद्र सरकार ने लगभग ₹62,500 करोड़ की ‘मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (MPMS) को स्वीकृति दी है। यह योजना मौजूदा वित्तीय वर्ष से शुरू होकर 2030-31 तक संचालित होगी। PLI योजना की सफलता के बाद नई नीति का लक्ष्य सिर्फ असेंबलिंग नहीं, बल्कि देश में वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देना है।
इस योजना के अंतर्गत पात्र मोबाइल निर्माताओं को बिक्री के आधार पर 2.25% से 5% तक का मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर पार्ट्स और कंपोनेंट्स की खरीद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनियों को 1.5% तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
एप्पल और गूगल का भारत पर बढ़ता भरोसा
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक Apple अब भारत में सिर्फ iPhone तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनी देश में अपने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को तेजी से एक्सपेंड करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अब आईफोन के अलावा एप्पल के अन्य प्रमुख हार्डवेयर प्रोडक्ट्स और जरूरी कंपोनेंट्स भी भारत में ही तैयार किए जाएंगे। इस कदम से स्थानीय सप्लायर्स और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही, गूगल को लेकर भी बड़े संकेत सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल अपने निर्यात-उन्मुख डिवाइसेस का उत्पादन चीन से भारत शिफ्ट करने की योजना बना रहा है। यदि यह योजना पूरी तरह अमल में आती है, तो भारत में गूगल के पिक्सल स्मार्टफोन और अन्य स्मार्ट डिवाइसेस का उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। कंपनियों द्वारा चीन के अलावा अन्य देशों में विनिर्माण केंद्र स्थापित करने की रणनीति से भारत को एक प्रमुख ग्लोबल एक्सपोर्ट बेस बनने का सीधा लाभ मिल रहा है।
भारतीय ब्रांड्स, डिजाइन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
सरकार की इस नई पहल में भारतीय कंपनियों और स्थानीय डिजाइन इकोसिस्टम पर विशेष ध्यान दिया गया है। घरेलू ब्रांड्स के लिए 5% इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है, जबकि भारत में ही रिसर्च, डेवलपमेंट और प्रोडक्ट डिजाइनिंग करने वाली कंपनियों को 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार भारतीय ब्रांड्स के साथ मिलकर अगले 10 से 14 महीनों के भीतर हाई-वॉल्यूम सेगमेंट के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्मार्टफोन डिजाइन तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है। पिछले एक दशक के आंकड़े भारत की इस बदलती तस्वीर को बयां करते हैं। वर्ष 2014 से 2025 के दौरान भारत के मोबाइल फोन निर्यात में लगभग 166 गुना की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आज देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण निर्यात में मोबाइल फोन का योगदान सबसे महत्वपूर्ण हो चुका है। वैश्विक दिग्गजों की बढ़ती भागीदारी और सरकारी प्रोत्साहन के बल पर भारत अब वैश्विक मोबाइल उद्योग के शीर्ष केंद्रों में अपनी जगह पक्की कर चुका है।












