उत्तरप्रदेश: मुज़फ़्फ़रनगर में सरसों की फसल काटने को लेकर हुए खूनी संघर्ष के करीब 16 साल पुराने मामले में अदालत ने सोमवार को चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत में पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने रामराज थाना क्षेत्र के हुसैनपुर निवासी रामवतार, प्रदीप और कुंवरपाल तथा बिजनौर के फैजीपुर निवासी जनेश्वर को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/149, 148, 323 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत दोषसिद्ध किया। अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया है। अब 31 अक्टूबर 2026 को सजा सुनाई जाएगी।
थाने में समझौते के अगले ही दिन भड़का विवाद, सरसों की फसल काटने पर हुआ खूनी टकराव
मामला 28 मार्च 2010 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हुसैनपुर निवासी विक्रम ने हंसावाला स्थित जमीन पर सरसों की फसल बो रखी थी। जमीन और फसल को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। घटना से एक दिन पहले 27 मार्च को रामराज थाने में थाना दिवस के दौरान विवाद सुलझाने की कोशिश की गई थी। शिकायत के मुताबिक, मौके पर जांच के बाद फैसला हुआ था कि सरसों की फसल विक्रम काटेगा। आरोप है कि अगले दिन फसल काटने पहुंचे विक्रम और उसके साथ आए लोगों का दूसरे पक्ष से विवाद हो गया।
खेत पर तमंचे, तलवार और लाठी-डंडों से हमला, किसान को मारी गोली, महिला पर चढ़ाया ट्रैक्टर
विजयपाल की शिकायत के मुताबिक, 28 मार्च की सुबह करीब आठ बजे विक्रम परिवार की महिलाओं, मजदूरों और अन्य लोगों के साथ मशीन लेकर खेत पर पहुंचा था। आरोप है कि वहां रामवतार पक्ष के लोगों ने हमला कर दिया। प्राथमिकी में तमंचे, बंदूक, तलवार और लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप लगाया गया था। इसी दौरान विक्रम के पेट में गोली लगने से वह गिर पड़ा। शिकायत में बृजेश पर तलवार से वार करने और सविता के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने का आरोप भी लगाया गया था। सविता के हाथ की हड्डी टूटने की बात भी शिकायत में कही गई थी।
16 साल लंबी कानूनी लड़ाई और 8 गवाहों के बाद 4 आरोपी दोषी करार, 31 अक्टूबर को तय होगी सजा
घटना के बाद 28 मार्च 2010 को रामराज थाने में मुकदमा अपराध संख्या 81/2010 दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के बाद 15 मई 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। मामले में एक अन्य आरोपी सूरजमल की मृत्यु हो गई थी, जिसके खिलाफ कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आशीष त्यागी ने पैरवी की। करीब 16 साल चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। दोषसिद्धि के बाद चारों को जेल भेज दिया गया है। अब 31 अक्टूबर को अदालत सजा के प्रश्न पर सुनवाई करेगी। उस दिन चारों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
Reported By: Rohit












