मथुरा: 15वें वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों को मिलने वाली टाइड फंड की धनराशि का निर्धारित कार्यों के बजाय अन्य विकास कार्यों में इस्तेमाल करना 21 ग्राम पंचायतों के सचिवों को भारी पड़ गया। जांच में शासनादेश के विपरीत धनराशि खर्च किए जाने की पुष्टि होने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. पूजा गुप्ता के निर्देश पर संबंधित सचिवों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। इनमें दो सचिव ऐसे हैं, जिन्होंने विभाग की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब तक नहीं दिया है।
टाइड फंड से केवल पेयजल, स्वच्छता और जल संरक्षण के कार्य कराने के निर्देश
दरअसल, 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली टाइड फंड की धनराशि खर्च करने के लिए शासन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत इस धनराशि का उपयोग पेयजल व्यवस्था, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नालियों के निर्माण और मरम्मत, स्वच्छता तथा ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन जैसे निर्धारित कार्यों पर ही किया जा सकता है। इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों में सचिवों ने नियमों को ताक पर रखकर इस धनराशि से सड़क निर्माण, पंचायत भवन और अन्य सामान्य विकास कार्य करा दिए।
सात विकासखंडों की 21 पंचायतों में फंड के दुरुपयोग की पुष्टि, सचिवों को प्रतिकूल प्रविष्टि
मामले की जानकारी मिलने पर सीडीओ डॉ. पूजा गुप्ता ने संबंधित ग्राम पंचायतों में खर्च की गई धनराशि की जांच कराई। जांच में फरह, चौमुहां, छाता, बलदेव, नौहझील, गोवर्धन और मथुरा विकासखंड की 21 ग्राम पंचायतों में टाइड फंड के दुरुपयोग का मामला सामने आया। जांच रिपोर्ट में निर्धारित मदों से इतर धनराशि खर्च किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। वहीं, दो सचिवों की ओर से स्पष्टीकरण न दिए जाने को भी गंभीरता से लिया गया है। शासन की ओर से निर्धारित वित्तीय नियमों की अनदेखी करने वाले पंचायत सचिवों पर कार्रवाई से विभाग में खलबली मची हुई है।
Reported By: Prem Kaushik












