नई दिल्ली: नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर के बीच आयोजित हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत और रूस के आर्थिक व रणनीतिक रिश्तों में एक बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता से पहले विमानन क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी की जमीन तैयार हो चुकी है। नई दिल्ली में चल रही ‘इनोप्रोम इंडिया’ एग्जीबिशन के मंच से रूसी कंपनियां भारतीय विमानन बाजार में अपनी मजबूत पैठ बनाने और 105 क्षेत्रीय यात्री विमानों की आपूर्ति के समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत SJ-100 रीजनल जेट का निर्माण
यह साझेदारी केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस भारत को एक प्रमुख विमान विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और UAC के बीच SJ-100 रीजनल जेट के घरेलू उत्पादन को लेकर हुई शुरुआती सहमति के बाद अब लाइसेंस निर्माण वार्ता करीब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है।
भारतीय विमानन क्षेत्र में रूसी UAC का बड़ा दांव
रूस की सरकारी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) का रीजनल पैसेंजर विमान IL-114-300 दोनों देशों के बीच सिविल एविएशन सहयोग का मुख्य आधार बनकर उभरा है। UAC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) वादिम बादेखा के अनुसार, बीते छह महीनों में भारतीय हितधारकों के साथ रणनीतिक बातचीत में काफी तेजी आई है।
प्रस्तावित समझौतों के तहत पिनेकल एयर के लिए 50 IL-114-300 विमान, एयर केरल के लिए 20 विमान और स्लीक एविएशन के साथ हुए एमओयू के तहत 35 अतिरिक्त विमानों की योजना शामिल है। इससे पहले जनवरी में हैदराबाद के ‘विंग्स इंडिया’ शो के दौरान फ्लेमिंगो एयरोस्पेस के साथ छह विमानों की शुरुआती डील की गई थी, जिसके बाद अब कुल 105 विमानों का यह बड़ा नेटवर्क देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूती देगा।
पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़ता औद्योगिक ढांचा
9 से 11 सितंबर तक आयोजित ‘इनोप्रोम इंडिया’ प्रदर्शनी में 120 से अधिक भारतीय और रूसी कंपनियां एक साथ आई हैं। रक्षा आपूर्ति और S-400 जैसे मिसाइल सिस्टम से इतर यह पहल दर्शाती है कि दोनों देश अब अपने आर्थिक संबंधों का दायरा नागरिक उड्डयन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे नागरिक क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ा रहे हैं। शुक्रवार को शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली वार्ता में यूक्रेन और ईरान संकट पर चर्चा के साथ-साथ इस औद्योगिक रोडमैप को अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है।












