नई दिल्ली: महाराष्ट्र के नागपुर से नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर बेहद क्रूर व्यवहार का मामला सामने आया है. पुलिस के अनुसार, 19 वर्षीय आरोपी ने इंस्टाग्राम के जरिए 16 साल की लड़की से दोस्ती की और बाद में उसे धमकाकर अपने नियंत्रण में कर लिया. आरोप है कि आरोपी ने लड़की को बंधक बनाकर उसका यौन शोषण किया और उसके साथ बेरहमी से मारपीट की. हमले में लड़की गंभीर रूप से घायल हुई, जिसके बाद पुलिस ने उसे बचाकर अस्पताल पहुंचाया.
फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से हुई दोस्ती
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था. इसी माध्यम से उसकी नाबालिग से बातचीत शुरू हुई. धीरे-धीरे आरोपी ने लड़की की निजी तस्वीरें हासिल कर ली और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देने लगा.
पुलिस का कहना है कि आरोपी इन तस्वीरों और लगातार वीडियो कॉल के जरिए लड़की पर दबाव बनाता था. बदनामी के डर से वह उसकी धमकियों का विरोध नहीं कर पाती थी. जांच अधिकारियों ने आरोपी की इस कथित रणनीति को डिजिटल नियंत्रण या ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा बताया है.
कमरे में बंधक बनाकर किया अत्याचार
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बाद में लड़की को नागपुर के दिघोरी इलाके में स्थित किराए के कमरे में कथित तौर पर बंधक बना लिया. वहां उसने लड़की के साथ यौन हिंसा की और उसे शारीरिक चोट दी.
आरोप है कि आरोपी ने लड़की को बेल्ट और कुत्तों के पट्टे से पीटा. इसके अलावा उस पर चाकू से हमला किया गया, जिससे उसके शरीर पर कई चोटें आईं. पुलिस ने इस मामले में इस्तेमाल किए गए सामान को भी जांच का हिस्सा बनाया है.
तकनीकी जांच से पुलिस तक पहुंची लोकेशन
नाबालिग के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. तकनीकी जानकारी की मदद से पुलिस को उसकी लोकेशन का पता चला. इसके बाद 3 अगस्त की रात पुलिस ने कमरे का दरवाजा खोलकर लड़की को सुरक्षित बाहर निकाला. आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया. घायल लड़की को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है.
मकान मालिक से भी पूछताछ
जांच के दौरान पुलिस ने उस मकान मालिक की भूमिका की भी जांच शुरू की है, जहां आरोपी ने कमरा किराए पर लिया था. पुलिस के अनुसार, किराएदार से जुड़ी जरूरी जानकारी और दस्तावेजों को लेकर नियमों का पालन नहीं किया गया था. फिलहाल आरोपी जेल में है और पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. नाबालिग की पहचान कानून के तहत गोपनीय रखी गई है.












