
नई दिल्ली: लद्दाख के मुद्दे पर चीन ने एक बार फिर भारत को उकसाने वाला बयान दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने लद्दाख को कभी मान्यता नहीं दी। उसके मुताबिक भारत ने इस इलाके पर "एकतरफा" और "गैर-कानूनी" तरीके से कब्जा कर रखा है।
बीजिंग में मंगलवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता माओ निंग से भारत सरकार के एक फैसले पर सवाल पूछा गया था। जवाब में उन्होंने कहा कि चीन भारत के बनाए तथाकथित लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को नहीं मानता। साथ ही उन्होंने जगहों के "स्टैंडर्ड नाम" जारी करने का कड़ा विरोध किया। माओ निंग के मुताबिक भारत का यह कदम अवैध और अमान्य है। उनका दावा है कि चीन-भारत सीमा का पश्चिमी हिस्सा हमेशा से चीन का रहा है और इस कदम से यह सच्चाई नहीं बदलेगी।
भारत का रुख क्या है
भारत का आधिकारिक और लगातार एक जैसा रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न हिस्से हैं। इनमें वे इलाके भी आते हैं, जिन पर फिलहाल पाकिस्तान (गिलगित-बाल्टिस्तान आदि) या चीन (अक्साई चिन) का अवैध कब्जा है। भारत इन्हें अवैध कब्जा बताता है और पूरे क्षेत्र को अपना मानता है। इसी वजह से चीन का ताजा बयान काफी अहम माना जा रहा है।
भारत ने क्या फैसला लिया था
2 अक्टूबर को भारत ने आधिकारिक नक्शे पर लद्दाख की 28 रणनीतिक जगहों और भौगोलिक विशेषताओं की पहचान की। यह फैसला लद्दाख प्रशासन से बातचीत के बाद लिया गया। इसका मकसद नक्शा बनाने की प्रक्रिया को बेहतर करना, जगहों की सही पहचान करना और संवेदनशील सीमा क्षेत्र को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना बताया गया है।
इस सूची में गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी हैं, जो एलएसी के पास तनाव वाले क्षेत्र रहे हैं। 2020 में भारत-चीन सेनाओं के बीच टकराव के दौरान ये जगहें काफी चर्चा में थीं। एलएसी के पास भारतीय सेना की गश्त के लिहाज से भी ये बेहद अहम हैं। इनके अलावा अलीशा गिरी, ब्रांगसा, चापचिंगल पास, कनिष्क पीक, करुण पीर पहाड़, कुकसेल, मार्तंड गिरी, पारपिक ग्लेशियर, स्कमरी ग्लेशियर, श्कोर्गा घाटी, ज़ोरावर पीक, डेहरा कंपास, ड्रैक कार्पो, जोल्मोरी, कुमारयाना पॉइंट, पांगलुंग, यांगपा नदी, शिवा री और महेश्वरा री समेत कई जगहें शामिल हैं। शामल लुंगपा को 1950 के दशक में गश्त और ठहराव के रास्ते के तौर पर बताया गया था।
2020 के बाद से तनाव
पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव की शुरुआत 5 मई 2020 को पैंगोंग झील इलाके में दोनों देशों के सैनिकों की हिंसक झड़प से हुई थी। 2022 में दोनों पक्षों ने सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब भारत के 28 जगहों को नक्शे पर दर्ज करने के बाद चीन ने अपना विरोध दोहराया है। उसका कहना है कि इससे सीमा के पश्चिमी सेक्टर पर उसकी स्थिति नहीं बदलेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी का यह दौर आगे कहां जाता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।












