नई दिल्ली: अमेरिका में अगले सप्ताह होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नतीजों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। ट्रंप ने कहा है कि वह चुनाव परिणामों को स्वीकार करेंगे, लेकिन इसके लिए चुनाव का निष्पक्ष तरीके से होना जरूरी है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब रिपब्लिकन पार्टी को कई राज्यों में कड़ी चुनौती मिलने की आशंका है। इन चुनावों का असर न केवल अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण पर पड़ेगा, बल्कि ट्रंप के आगे के राजनीतिक एजेंडे के लिए भी अहम साबित हो सकता है।
मंगलवार, 27 अक्टूबर को टेक्सास के दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, “अगर चुनाव ईमानदारी से होते हैं, तो मैं मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों का सम्मान करूंगा।” ट्रंप टेक्सास में रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के समर्थन में प्रचार करने जा रहे थे। पैक्सटन का मुकाबला सीनेट सीट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको से है।
रिपब्लिकन पार्टी को क्यों सता रही हार की चिंता?
चुनाव नजदीक आते ही ट्रंप ने उन राज्यों में प्रचार तेज कर दिया है, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों को अलास्का से लेकर साउथ कैरोलिना तक कई मुकाबलों में कड़ी टक्कर मिलने की आशंका है। रिपब्लिकन नेताओं की चिंता की एक बड़ी वजह आर्थिक मुद्दे हैं। ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान के साथ युद्ध से जुड़े हालात के कारण महंगाई का मुद्दा मतदाताओं के बीच चर्चा में है। पार्टी के भीतर आशंका है कि बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की नाराजगी चुनाव में उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है।
3 नवंबर को कांग्रेस की 470 सीटों पर होगा मतदान
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों के लिए मतदान होगा। इन नतीजों से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी को बहुमत मिलता है। जनमत सर्वेक्षणों के संकेतों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने की स्थिति में हो सकती है। वहीं, सीनेट में दोनों दलों के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण बना हुआ है।
डेमोक्रेट्स जीते तो ट्रंप के सामने बढ़ेंगी चुनौतियां
फिलहाल कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। इसी वजह से ट्रंप को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलती रही है। लेकिन यदि चुनाव में डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो राष्ट्रपति के लिए नए कानूनों और अपनी नीतियों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा, डेमोक्रेटिक पार्टी को ट्रंप प्रशासन के फैसलों और कामकाज की संसदीय जांच शुरू करने का मौका भी मिल सकता है। ऐसे में ये चुनाव ट्रंप के लिए सत्ता में बने रहने से आगे, अपने एजेंडे को लागू करने की क्षमता की भी परीक्षा होंगे।












