नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को लेकर एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सलाहकार नकदी ने कहा है कि ईरान जरूरत पड़ने पर अमेरिका के साथ संघर्ष को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने तक लंबा खींच सकता है.
ईरान ने बताई संघर्ष लंबा खींचने की वजह
PBS NewsHour को दिए इंटरव्यू में नकदी ने दावा किया कि अमेरिका के ईरान के खिलाफ दो प्रमुख लक्ष्य थे. पहला देश के नेतृत्व को हटाना और दुसरा ईरान को कमजोर या विभाजित करना. उनके मुताबिक, अमेरिका इन उद्देश्यों में सफल नहीं हुआ.
नकदी ने कहा कि संघर्ष जितना लंबा चलेगा, ईरान को उतना ही अधिक अनुभव मिलेगा. उन्होंने अमेरिकी सैन्य क्षमता पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि युद्ध के दौरान अमेरिका की कमजोरी सामने आई है. उनके अनुसार, ईरान का उद्देश्य ऐसा सैन्य संतुलन तैयार करना है जिससे भविष्य में कोई भी देश उस पर हमला करने से पहले उसके संभावित नुकसान के बारे में सोचे.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिया बयान
ईरानी अधिकारी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में ईरान उन समुद्री रास्तों पर नियंत्रण कर सकता है, जिन्हें वह अपने लिए खतरा मानता है.
नकदी ने यह भी दावा किया कि ईरान के पास बड़ी संख्या में मिसाइल और ड्रोन मौजूद हैं और उनका उत्पादन लगातार जारी है. उनके मुताबिक, ईरान रोजाना जितने हथियार इस्तेमाल करता है, उससे अधिक संख्या में नए हथियार बनाए जा रहे हैं.
परमाणु हथियारों पर क्या कहा?
जब उनसे पूछा गया कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करता है तो क्या होगा, उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसा होने की अनुमति नहीं देगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की लड़ाई अमेरिकी जनता से नहीं, बल्कि अमेरिकी नेतृत्व की नीतियों से है. नकदी ने कहा कि ईरान अपनी ताकत और विचारधारा को परमाणु हथियारों से नहीं, बल्कि अपने लोगों और प्रतिरोध की क्षमता से जोड़ता है.












