नई दिल्ली: देश में कैंसर के इलाज में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले छह महीनों में डॉक्टर पहले से कहीं ज्यादा मरीजों को इम्यूनोथेरेपी लिख रहे हैं। यह आधुनिक कैंसर ट्रीटमेंट का सबसे कारगर तरीका है, लेकिन अभी तक इसकी आसमान छूती कीमत के कारण आम मरीज इससे दूर थे।
इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह है प्रमुख इम्यूनोथेरेपी दवा ‘निवोलुमैब’ के सस्ते बायोसिमिलर वर्जन का मार्केट में आना। टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) के डॉक्टरों के मुताबिक यह दवा करीब 25 तरह के ट्यूमर और लगभग 100 प्रकार के कैंसर में प्रभावी है। भारतीय रिसर्च ने यह भी साबित किया है कि कुछ केस में कम डोज भी भारतीय मरीजों पर बेहतर असर दिखाती है, जिससे खर्च और कम हो जाता है।
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. इमरान शेख बताते हैं कि सस्ती दवा आने के बाद पिछले छह महीने में उनके प्रिस्क्रिप्शन 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं। पहले जहां एक साइकिल पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च आता था और मरीज इलाज से हिचकते थे, वहीं अब 30 हजार रुपये की कीमत पर वे आसानी से इलाज करा रहे हैं।
पहुंच में आया बड़ा उछाल
2022 में TMC की एक स्टडी में सामने आया था कि इम्यूनोथेरेपी के योग्य मरीजों में से सिर्फ 2.8 प्रतिशत को ही यह इलाज मिल पा रहा था। अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। TMC परेल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी हेड डॉ. कुमार प्रभास के अनुसार, इस थेरेपी ने जानलेवा कैंसर में जीने की उम्मीद बढ़ा दी है। स्किन कैंसर में पहले 100 में से सिर्फ 5 मरीज लंबे समय तक बचते थे, अब यह दर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एडवांस फेफड़ों के कैंसर के मरीज भी 5 साल या उससे ज्यादा जी रहे हैं। कोलन कैंसर के शुरुआती मामलों में अब बिना कीमो और सर्जरी के सिर्फ इम्यूनोथेरेपी से मरीज का अंग बचाते हुए इलाज किया जा रहा है।
कीमत और घटने की उम्मीद
हालांकि चुनौतियां अभी भी हैं। भारत में अभी केवल 7 चेकपॉइंट इनहिबिटर दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि चीन में 35 हैं। बाकी 6 दवाएं इंपोर्ट होती हैं और लाखों रुपये में पड़ती हैं। NPPA ने 8 नवंबर से 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप लगाया है, जिससे सालाना 2500 करोड़ रुपये बचने की उम्मीद है। लेकिन एक्सपर्ट के.एम. गोपीकुमार का कहना है कि कई अस्पताल अपने ही मेडिकल स्टोर से दवा लेने की शर्त रखते हैं और ज्यादा मुनाफे के लिए महंगी ओरिजिनल दवाएं ही रखते हैं।
अच्छी बात यह है कि निवोलुमैब के चार और सस्ते वर्जन आने वाले हैं, जिससे इसकी कीमत 30 हजार से घटकर 10 हजार रुपये तक आ सकती है, लेकिन यह अस्पतालों के रवैये पर निर्भर करेगा।












