छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ की LPG गैस को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, 4 लोग गिरफ्तार

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Major Revelation Regarding LPG Worth 1 5 Crore in Chhattisgarh 4 Arrested
Major Revelation Regarding LPG Worth 1 5 Crore in Chhattisgarh 4 Arrested

रायपुर: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एलपीजी गैस चोरी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां करीब 1.5 करोड़ रुपये की गैस हेराफेरी का खुलासा हुआ है. इस मामले में पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर को गिरफ्तार किया है. वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है.

क्या है पूरा मामला 

पुलिस जांच के मुताबिक दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 90 मीट्रिक टन एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था. दस्तावेजों की कमी के कारण इन वाहनों को थाने में रखा गया था. सुरक्षा कारणों से बाद में जिला प्रशासन के निर्देश पर इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया गया. इसी के तहत मार्च 2026 में खाद्य विभाग की टीम ने इन ट्रकों को अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के हवाले कर दिया.

जांच में सामने आई चौंकाने वाली वजह 

जांच में सामने आया कि ट्रकों को प्लांट तक पहुंचाने के दौरान कहीं भी वजन नहीं कराया गया। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने गैस को अवैध रूप से निकालकर बेचने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार आठ दिनों तक प्लांट में गैस को बुलेट टैंकों और निजी टैंकरों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद अलग-अलग एजेंसियों को बिना पक्के बिल के गैस सप्लाई की गई।

दस्तावेजों में भी हुई गड़बड़ी 

जांच में सामने आया कि इतनी बड़ी मात्रा में गैस का प्राकृतिक रूप से लीकेज होना संभव नहीं था. जांच रिपोर्ट में कहा गया कि बिना किसी दुर्घटना के तीन महीनों में 20 टन गैस का खत्म होना तकनीकी रूप से नामुमकिन है. इससे साफ हुआ कि गैस को जानबूझकर निकाला गया. इतना ही नहीं, दस्तावेजों की जांच में भी भारी गड़बड़ी सामने आई. रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी ने अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी थी लेकिन बिक्री 107 टन दिखाई गई. यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जिसकी खरीद का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला.

बता दें, पुलिस ने मामले में सात एलपीजी टैंकर, चार बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं. जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों ने सबूत मिटाने और रिकॉर्ड गायब करने की भी कोशिश की. वहीं अब मामले की जांच अभी जारी है.

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