'भारत में आधुनिक समस्याएं', मुंबई मेट्रो ने स्टेशनों पर लगाया दुनिया का पहला 'स्पिट बिन', सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली: मुंबई मेट्रो में अब एक ऐसी जगह बना दी गई है, जहां यात्री बेझिझक थूक सकते हैं। सुनने में यह भले अजीब लगे, लेकिन यह सच है। हालांकि इसमें एक दिलचस्प पेच भी छिपा है, क्योंकि मेट्रो के अपने ही नियमों के मुताबिक थूकने पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगता है। यही विरोधाभास अब सोशल मीडिया पर लोगों के बीच जमकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस अनोखी सुविधा पर सबसे पहले एक्स यूजर ज़ोरू भाथेना की नजर पड़ी, जिन्होंने इसकी तस्वीर शेयर करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा कि अब मुंबई मेट्रो में थूकने के लिए भी अलग जगह बना दी गई है। तस्वीर में महा मुंबई मेट्रो के एक स्टेशन पर लगा टचलेस कूड़ेदान दिखाई दे रहा था, जिसके ऊपर एमएमआरडीए और महा मुंबई मेट्रो के लोगो के साथ “जिम्मेदार बनें” का संदेश लिखा हुआ था।

दुनिया की पहली अनोखी पहल

इस सुविधा को “थूकने के लिए दुनिया का पहला निर्धारित स्थान” के तौर पर पेश किया गया है। इसके इस्तेमाल की पूरी जानकारी मराठी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में लिखी गई है। इस “टचलेस स्पिट बिन” को खासतौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्री इसे बिना छुए भी आसानी से इस्तेमाल कर सकें। यह पहल ईज़ीस्पिट नाम की एक कंपनी की है, जो सार्वजनिक जगहों पर थूकने की समस्या से निपटने के लिए खास समाधान तैयार करती है।

नियमों में छिपा है असली विरोधाभास

मुंबई मेट्रो रेलवे निगम की वेबसाइट पर दर्ज नियमों के मुताबिक धारा 59(1) के तहत मेट्रो में थूकना, उपद्रव करना या किसी भी यात्री की परेशानी का कारण बनना अपराध माना जाता है। इसके लिए 500 रुपये का जुर्माना, टिकट या पास जब्त करने और गाड़ी से बाहर निकालने जैसी सजा का प्रावधान है। ऐसे में एक तरफ थूकने के लिए खास जगह बनाना, और दूसरी तरफ उसी काम पर जुर्माना लगाना, यही विरोधाभास लोगों को चौंका रहा है।

यह तस्वीर सामने आते ही लोगों ने हैरानी, उलझन और आलोचना, तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने इसे एक गहरी जड़ें जमा चुकी सार्वजनिक आदत से निपटने की व्यावहारिक कोशिश बताया। वहीं कुछ अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि “जिम्मेदार बनें” का संदेश देने वाली यह सुविधा उन्हीं नियमों के साथ नजर आ रही है, जो थूकने पर सजा का प्रावधान करते हैं। कुछ यूजर्स ने व्यावहारिक नजरिया अपनाते हुए कहा कि अगर लोग पूरी तरह थूकना बंद नहीं करेंगे, तो कम से कम एक नियंत्रित और साफ-सुथरा विकल्प देने से फुटपाथ और दीवारें गंदी होने से बच सकती हैं। कुल मिलाकर मुंबई मेट्रो की यह नई सुविधा लोगों के बीच बहस छेड़ने में जरूर कामयाब रही है।

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