नई कार की वारंटी में क्या मिलता है कवर? इन चीजों पर कंपनी नहीं देती वारंटी

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New Car Warranty
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नई दिल्ली: नई कार खरीदने के बाद डीलर की तरफ से वारंटी कार्ड दिया जाता है, लेकिन कई लोग इसे पढ़े बिना रख देते हैं. दरअसल, यह कार्ड काफी जरूरी होता है. वारंटी के दौरान अगर कार में किसी पार्ट या सिस्टम में कंपनी की वजह से खराबी आती है, तो उसे तय नियमों के अनुसार कंपनी मुफ्त में ठीक करती है.

आमतौर पर कार कंपनियां 3 साल या 1 लाख किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं, हालांकि कुछ कंपनियां 5 से 7 साल तक का कवरेज भी देती हैं. इसलिए कार खरीदते समय यह जरूर जांच लें कि वारंटी कितने समय और कितने किलोमीटर तक है और इसमें कौन-कौन से पार्ट्स शामिल हैं. वारंटी की शर्तों की जानकारी पहले से होने पर बाद में अनचाहे खर्च से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं नई कार की वारंटी में क्या कवर होता है और किन चीजों का खर्च आपको खुद उठाना पड़ सकता है.

वारंटी में क्या-क्या शामिल होता है?

नई कार की वारंटी में आमतौर पर इंजन और गियरबॉक्स सबसे प्रमुख होते हैं. अगर इनमें मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के कारण कोई खराबी आती है, तो कंपनी तय शर्तों के तहत उसे मुफ्त में ठीक या बदल सकती है. इसके अलावा वायरिंग, सेंसर, म्यूजिक सिस्टम जैसे कई इलेक्ट्रिकल पार्ट्स भी वारंटी में शामिल हो सकते हैं. सस्पेंशन, स्टीयरिंग और AC सिस्टम को भी आमतौर पर कवरेज मिलता है. कुछ कंपनियां पेंट और जंग के लिए अलग से कोरोजन वारंटी देती हैं. वहीं, कुछ ब्रांड बैटरी और टायर पर भी सीमित वारंटी देते हैं.

अगर कोई पार्ट बार-बार खराब होता है और वारंटी की शर्तों के तहत आता है, तो कंपनी उसे बदल भी सकती है. हालांकि, वारंटी का लाभ लेने के लिए समय पर सर्विस कराना और कंपनी की सभी शर्तों का पालन करना जरूरी है.

वारंटी में क्या शामिल नहीं होता?

नई कार की वारंटी में हर तरह की खराबी कवर नहीं होती. सामान्य टूट-फूट वाली चीजों जैसे ब्रेक पैड, क्लच प्लेट, वाइपर ब्लेड और बल्ब का खर्च आमतौर पर कार मालिक को खुद उठाना पड़ता है, क्योंकि ये समय के साथ खराब होते हैं. अगर कार को एक्सीडेंट या दुर्घटना में नुकसान पहुंचता है, तो उसका खर्च वारंटी के बजाय इंश्योरेंस के तहत आता है. इसी तरह, कार में कंपनी से अलग कोई मॉडिफिकेशन या नॉन-कंपनी पार्ट लगवाने से हुई खराबी भी वारंटी से बाहर हो सकती है.

इसके अलावा समय पर सर्विस न कराने, गलत ईंधन डालने या कंपनी की शर्तों का पालन न करने से हुई खराबी का खर्च भी आपको खुद देना पड़ सकता है. बाढ़, आग या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को भी आमतौर पर वारंटी में शामिल नहीं किया जाता. इसलिए कार खरीदते समय वारंटी की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है.

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