नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। पापांकुशा एकादशी का व्रत हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सारे पाप मिट जाते हैं। लेकिन इस साल एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की सही तारीख क्या है।
पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे से शुरू होगी और 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे तक रहेगी। व्रत हमेशा उदया तिथि में रखा जाता है, यानी जिस दिन एकादशी तिथि में सूर्योदय हो। 21 अक्टूबर को तिथि दोपहर में शुरू हो रही है, इसलिए उस दिन सूर्योदय एकादशी में नहीं है। 22 अक्टूबर को सुबह सूर्योदय एकादशी तिथि में होगा। इसलिए पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
इस बार बन रहे हैं 3 शुभ संयोग
इस साल की पापांकुशा एकादशी बहुत खास है, क्योंकि इस पर तीन शुभ संयोग बन रहे हैं। पहला संयोग यह है कि इस बार एकादशी गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन पूजा करने से दोगुना फल मिलने की मान्यता है। दूसरा संयोग वृद्धि और ध्रुव योग का है। इस दिन वृद्धि योग सुबह से रात 11:40 बजे तक रहेगा, उसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा, और दोनों ही योग शुभ माने जाते हैं। तीसरा संयोग शतभिषा नक्षत्र का है, जो एकादशी के दिन सुबह से रात 8:49 बजे तक रहेगा और पूजा के लिए अच्छा माना जाता है।
पापांकुशा एकादशी पूजा मुहूर्त 2026
अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो इन शुभ मुहूर्तों में पूजा कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:45 से 5:35 बजे तक रहेगा, जो स्नान और संकल्प के लिए उपयुक्त है। शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 6:26 से 7:51 बजे तक है और इसे विष्णु पूजा के लिए सबसे अच्छा माना गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 1:58 से 2:44 बजे तक और अमृत काल दोपहर 1:18 से 2:58 बजे तक रहेगा।
इस दिन सुबह 6:26 बजे से दोपहर 2:47 बजे तक भद्रा रहेगी। इस दौरान कोई नया या मांगलिक काम शुरू न करें, लेकिन एकादशी की पूजा पर इसका कोई असर नहीं होगा। पंचक पूरे दिन रहेगा, जो अशुभ नहीं है। व्रत का पारण अगले दिन 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 बजे से 8:42 बजे के बीच किया जाएगा।
महत्व क्या है?
मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से पिछले जन्मों के पाप भी मिट जाते हैं। भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।












