नई दिल्ली: पितृ पक्ष का पावन दौर शुरू हो चुका है और श्राद्ध पक्ष के अभी करीब 9 दिन बाकी हैं। हिंदू धर्म में यह समय हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जताने का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में किया गया तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म पितरों को तृप्त करता है और वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। लेकिन अगर यह सब विधि-विधान से न किया जाए, तो पितरों को तृप्ति नहीं मिलती। आइए जानते हैं श्राद्ध से जुड़े वे जरूरी नियम, जिनका पालन करना बेहद अहम माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध से जुड़े सभी मुख्य कार्य हमेशा दोपहर के समय यानी अपराह्न काल में ही किए जाने चाहिए। साथ ही यह कर्म अपनी निजी भूमि पर या फिर किसी पवित्र तीर्थ स्थल पर ही संपन्न करना चाहिए।
भोजन में किन चीजों का रखें खास ध्यान
श्राद्ध के भोजन में शुद्ध गाय के घी, दूध और दही का इस्तेमाल सबसे उत्तम माना जाता है। इसके साथ ही जौ, मटर, कांगनी और खासतौर पर काले तिल का प्रयोग जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि तिल जितनी अधिक मात्रा में इस्तेमाल किए जाएं, श्राद्ध उतना ही अक्षय फल देने वाला होता है, क्योंकि तिल बुरी शक्तियों से रक्षा करते हैं। इसके अलावा पवित्र कुशा घास का भी श्राद्ध में खास महत्व बताया गया है।
अगर आर्थिक रूप से संभव हो, तो श्राद्ध के दौरान चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल करना और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को चांदी दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितृगण विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।
ब्राह्मण को भोजन कराने के नियम
श्राद्ध से एक दिन पहले ही ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक भोजन का निमंत्रण दे देना चाहिए। अगर दिवंगत पूर्वज पुरुष हैं, तो पुरुष ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए, और अगर पूर्वज महिला थीं, तो ब्राह्मण की पत्नी को भोजन कराया जाना चाहिए। भोजन हमेशा दोनों हाथों से आदरपूर्वक परोसें और ब्राह्मण को कुश या कंबल के आसन पर आराम से बैठाएं। यह भोजन सिर्फ एक योग्य ब्राह्मण को ही देना चाहिए, और भोजन के बाद अपनी क्षमता अनुसार दक्षिणा व वस्त्र जरूर भेंट करें।
पंचबलि और परिवार से जुड़े नियम
श्राद्ध के भोजन में से गाय, देवता, कौए, कुत्ते और चींटियों के लिए अलग हिस्सा निकालना अनिवार्य माना जाता है। ब्राह्मण और इन जीवों को भोजन कराने के बाद ही घर के बाकी सदस्यों को भोजन करना चाहिए। अगर बहन, जमाई या भांजे उसी शहर में रहते हैं, तो उन्हें भी भोजन के लिए जरूर बुलाना चाहिए। साथ ही अगर इस दिन कोई भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आ जाए, तो उसे खाली हाथ न भेजकर आदरपूर्वक भोजन कराना चाहिए।












