अखिलेश यादव के खिलाफ यूपी में पोस्टर वार: ‘सपाइयों का क्या भरोसा’ के नारे के साथ अतीक-मुख्तार की तस्वीर भी शामिल

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी माहौल गर्माने लगा है। इस बार चर्चा की वजह नेताओं के बयान नहीं, बल्कि सड़कों और चौराहों पर लगाए गए पोस्टर हैं। शुक्रवार सुबह प्रदेश के कई शहरों में लोगों की नजर जब इन पोस्टरों पर पड़ी, तो राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। इन पोस्टरों के जरिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है। खास बात यह है कि पोस्टरों में तुकबंदी वाले नारों और तस्वीरों के जरिए तंज कसने की कोशिश की गई है।

लखनऊ में नेशनल पीजी कॉलेज क्रॉसिंग के पास लगा एक बड़ा पोस्टर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें अखिलेश यादव की गोल टोपी पहने तस्वीर के साथ माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। पोस्टर पर लिखा है, ‘चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई।’ इस नारे के जरिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा गया है। पोस्टरों में इस्तेमाल की गई तस्वीरों और नारों को इस तरह तैयार किया गया है कि लोगों का ध्यान आसानी से इनकी ओर जाए। राजनीतिक संदेश देने के लिए खाने-पीने की चीजों के नामों के साथ तुकबंदी का भी इस्तेमाल किया गया है।

यूपी के 15 जिलों में दिखाई दिए पोस्टर

ये पोस्टर केवल लखनऊ तक सीमित नहीं हैं। खबर के मुताबिक, प्रदेश के करीब 15 जिलों में अखिलेश यादव के खिलाफ ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर समेत कई जिले शामिल हैं। पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं।

इन पर लिखा गया है, ‘सपाइयों का क्या भरोसा, चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई।’ इन नारों के जरिए सपा के राजनीतिक रुख और उसके नेताओं को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

भर्ती परीक्षा और परिवारवाद को लेकर भी निशाना

पोस्टरों में समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के दौरान हुई 2013 की यूपी-पीसीएस भर्ती परीक्षा का भी जिक्र किया गया है। इनमें दावा किया गया है कि 86 में से 56 पद एक खास जाति के लोगों को मिले थे। इस दावे के साथ पोस्टर पर लिखा है, ‘रसगुल्ला और रसमलाई, एक जाति की सत्ता आई।’ हालांकि, पोस्टर में किए गए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

इसके अलावा, सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए लिखा गया है, ‘दाल, चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार।’ पोस्टरों में अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टी और सपा सरकार के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र किया गया है। इस संबंध में पोस्टर पर ‘दंगा, इफ्तार और बिरयानी, सपा राज की असल कहानी’ लिखा गया है।

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