पंजाब सरकार का राहत भरा कदम, ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत बर्न मरीजों को मिला ₹1.39 करोड़ का मुफ्त इलाज

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चंडीगढ़: आग की लपटें भले ही चंद मिनटों में शांत हो जाती हैं, लेकिन वे अपने पीछे एक ऐसा दर्द छोड़ जाती हैं जो महीनों और कई बार सालों तक पीछा नहीं छोड़ता। गंभीर रूप से झुलसे इंसान के लिए आग से बाहर निकलना केवल एक शुरुआत होती है। असली संघर्ष तो उसके बाद शुरू होता है। बार-बार होने वाली ड्रेसिंग, जटिल सर्जरीज, लंबी थेरेपी और रिकवरी का भारी-भरकम खर्च। पंजाब में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (एमएमएसवाई) ऐसे ही परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा संबल बनकर उभरी है। योजना के ताजा आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 265 बर्न ट्रीटमेंट पूरी तरह कैशलेस उपलब्ध कराए गए हैं, जिन पर सरकार ने ₹1.39 करोड़ की राशि खर्च की है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि जलने का घाव सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं रहता, यह पूरे परिवार की आर्थिक कमर तोड़ देता है। ऐसे में मरीज अस्पताल के बिलों की चिंता छोड़कर सिर्फ अपनी रिकवरी और सामान्य जिंदगी में लौटने पर ध्यान दे पा रहे हैं।

बठिंडा बना उम्मीद का केंद्र

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग देश का कामकाजी तबका और बच्चे हैं। योजना के तहत 31 से 45 वर्ष के पुरुषों के 61 उपचार हुए, जिस पर ₹31.82 लाख का खर्च आया। वहीं, 0 से 18 वर्ष तक के 39 लड़कों और 27 लड़कियों का भी इलाज किया गया। महिलाओं में 19 से 30 वर्ष की 26 मरीज शामिल रहीं। ये आंकड़े मेडिकल रिसर्च की उन रिपोर्ट्स को पुख्ता करते हैं, जो कहती हैं कि बर्न इंजरी का सबसे बड़ा शिकार 15 से 45 वर्ष के वे लोग होते हैं, जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती है।
क्षेत्रीय आंकड़ों की बात करें तो बठिंडा जिला इलाज के मामले में सबसे आगे रहा, जहां 57 लोगों को 63 उपचार मिले और ₹33.51 लाख खर्च किए गए। इसके बाद फरीदकोट में 40 और पटियाला में 39 लाभार्थियों ने इस योजना का लाभ उठाया।

शॉर्ट सर्किट से झुलसे अर्जुन को मिला नया जीवन

बठिंडा के 24 वर्षीय अर्जुन कुमार की कहानी इस योजना के प्रभाव को साफ बयां करती है। घर में शॉर्ट सर्किट के कारण हुए हादसे में अर्जुन गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें तुरंत बठिंडा के अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब ₹50,000 का पूरा इलाज कैशलेस हुआ। अर्जुन याद करते हैं कि हादसे के वक्त सब कुछ इतनी तेजी से घटा कि संभलने का मौका ही नहीं मिला, लेकिन जब पता चला कि इलाज का कोई पैसा नहीं देना है, तो दिमाग से अस्पताल के बिल का बोझ पूरी तरह उतर गया।

त्वचा सिकुड़ने की समस्या ‘पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर’ का भी मिला समाधान

आग बुझने के बाद भी त्वचा के सिकुड़ने से शरीर के अंगों की गति सीमित हो जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर’ कहते हैं। यह कोई कॉस्मेटिक समस्या नहीं, बल्कि इंसान की कार्यक्षमता छीन लेने वाली स्थिति है। योजना के तहत इस जटिल समस्या के 75 सफल उपचार किए गए, जिन पर ₹38.90 लाख खर्च हुए। इसके अलावा टिश्यू एक्सपैंडर, केमिकल और इलेक्ट्रिकल बर्न, डिब्राइडमेंट, एंटीबायोटिक ड्रेसिंग, स्किन फ्लैप और कान-नाक के रिकंस्ट्रक्शन जैसे जटिल इलाज भी शामिल रहे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के शब्दों में कहें तो जब घर में आग बुझती है, तो मुख्यमंत्री सेहत योजना यह सुनिश्चित करती है कि परिवार को अस्पताल के भारी-भरकम बिलों की ‘दूसरी आग’ का सामना न करना पड़े।

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