नई दिल्ली: सावन का तीसरा सोमवार इस साल विशेष संयोग लेकर आ रहा है. बता दें, 17 अगस्त 2026, सोमवार को सावन सोमवार के साथ नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा. खास बात है कि सावन का सोमवार और नागपंचमी का यह संयोग करीब 23 साल बाद बना है. इससे पहले वर्ष 2003 में नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ी थी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
सोमवती नागपंचमी का महत्व
सावन का सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है. मान्यता है कि नाग भगवान शिव के प्रिय गण और उनके आभूषण हैं. ऐसे में दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने से शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर बन रहा है. नाग देवताओं को धन-संपदा का रक्षक भी माना जाता है.
नागपंचमी पूजा के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे शुरू होकर 17 अगस्त की शाम 5 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर नागपंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:24 से 5:08 बजे तक
रवि योग: सुबह 5:51 से 8:04 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:51 बजे तक
शाम का पूजा मुहूर्त: शाम 6:59 से रात 8:04 बजे तक
कैसे करें पूजा?
इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा करें. धूप-दीप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। नाग देवता के लिए ‘ॐ नागदेवताय नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है. घर के मुख्य द्वार पर गोबर या हल्दी-चंदन से नाग की आकृति बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है. इसके अलावा नाग-नागिन की धातु की प्रतिमा का पूजन किया जा सकता है.
इन कामों से बचें
नागपंचमी पर जमीन खोदने की मनाही मानी जाती है. सांपों को परेशान करने या उन्हें दूध पिलाने से भी बचना चाहिए। दूध केवल नाग देवता की प्रतिमा पर अर्पित करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सुई, कैंची और चाकू जैसी धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए. लोहे के बर्तनों के प्रयोग को लेकर भी कुछ परंपराओं में निषेध बताया गया है. जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प या राहु-केतु से जुड़े दोष बताए गए हैं, वे इस दिन अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार रुद्राभिषेक या विशेष पूजा करा सकते हैं.












