नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है. इस दिन श्रीहरि विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ अजा एकादशी का व्रत करने और कथा सुनने से नकारात्मक कर्मों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
अजा एकादशी की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र सत्य और धर्म का पालन करने वाले महान राजा थे. एक समय उनके जीवन में ऐसा संकट आया कि उन्हें अपना राजपाट और संपत्ति छोड़नी पड़ी. हालात इतने कठिन हो गए कि उन्हें अपने परिवार से भी अलग होना पड़ा और जीविका के लिए दूसरे के यहां काम करना पड़ा.
कठिन परिस्थितियों के बावजूद राजा ने सत्य का रास्ता नहीं छोड़ा. इसी दौरान उनकी भेंट गौतम ऋषि से हुई. राजा ने ऋषि को अपनी परेशानियां बताई. उनकी स्थिति सुनकर गौतम ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण एकादशी यानी अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी.
ऋषि ने बताया कि यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और नियमपूर्वक इसका पालन करने से जीवन के संकट कम हो सकते हैं. राजा हरिश्चंद्र ने श्रद्धा के साथ व्रत रखा और श्रीहरि की पूजा की.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत के प्रभाव से राजा के जीवन के दुख दूर होने लगे. उन्हें अपना खोया हुआ राज्य, धन और परिवार वापस मिल गया. अंत में भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई.
अजा एकादशी पर कैसे करें पूजा?
इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल की सफाई करके श्रीहरि की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. भगवान को पीले फूल, पीले वस्त्र, फल और सात्विक भोग अर्पित करें. दीप और धूप जलाकर विष्णु जी की पूजा करें.
पूरे दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. शाम को भगवान विष्णु की आरती करें और अजा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें. अगले दिन द्वादशी पर पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत का पारण करें और जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और नियम के साथ अजा एकादशी का व्रत करने से श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.












