वोटर लिस्ट के SIR पर घमासान, चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज

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जंतर-मंतर पर जुटे विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पर्याप्त स्पष्टीकरण सामने आना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग से प्रक्रिया को लेकर जवाब और अधिक पारदर्शिता की मांग की। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल रही। यह विरोध ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विपक्षी दलों तथा नागरिक समूहों की आलोचना बढ़ी है। इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां जताए जाने का दावा किया गया था। आयोग ने कहा है कि तीन सदस्यीय आयोग के फैसले, जिनमें SIR से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं, सर्वसम्मति से लिए गए।

सवाल सिर्फ दिल्ली का नहीं, दूसरे शहरों में भी उठा मुद्दा

SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विरोध की गतिविधियां दिल्ली तक सीमित नहीं रहीं। मुंबई में भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। वहां प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग उठाई। इस तरह मामला अलग-अलग शहरों में राजनीतिक और नागरिक बहस का हिस्सा बनता दिखाई दिया।

राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठन भी मैदान में

जंतर-मंतर के प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेताओं के अलावा AISA, SFI और DYFI से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हुए। इससे साफ है कि विरोध का दायरा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न संगठनों ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े अपने सवालों को प्रदर्शन के जरिए सामने रखा।

प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली में बढ़ा सुरक्षा इंतजाम

प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सभा की अनुमति नहीं दी थी और मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई थी। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की। दिल्ली मेट्रो ने भी कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद किए, जबकि यातायात के लिए अलग व्यवस्था की गई।

अब बहस SIR की प्रक्रिया और चुनावी भरोसे पर

जंतर-मंतर का प्रदर्शन एक बड़े सवाल को सामने लाता है—मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर जनता को कितनी जानकारी और स्पष्टीकरण मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों को आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

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