नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष दिन-ब-दिन और अधिक खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। जून में युद्ध समाप्त करने के लिए MOU पर हस्ताक्षर होने के बावजूद दोनों देशों के बीच हमले और पलटवार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर सियासत गर्मा गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने अमेरिका से नए हमले न करने की गुहार लगाई थी। ईरान की मीडिया और सैन्य अधिकारियों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वे न तो अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाए हैं और न ही किसी दबाव में झुकने वाले हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से ही ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को ब्लॉक कर रखा है।
ईरानी मीडिया का करारा जवाब
ईरानी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ ने सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को एक नया और बेबुनियाद झूठ करार दिया है। शनिवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा था कि अमेरिका आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन तेहरान और मध्य पूर्व के अन्य देशों ने उनसे हमले रोकने की अपील की थी।
ट्रंप ने यह शर्त रखी थी कि अमेरिका तभी पीछे हटेगा जब होर्मुज स्ट्रैट को तुरंत पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया जाए और ईरान के परमाणु खतरे को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए।
अवैध हमलों के आरोप
ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका पर 18 जून को हुए शांति समझौते का खुलेआम उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी सेना लगातार ईरानी बंदरगाहों, वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बना रही है। इसके साथ ही नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर अवैध दबाव बनाया जा रहा है। ईरान का कहना है कि सैन्य व गैर-सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का स्पष्ट उल्लंघन हैं।
रक्षा के लिए विकल्प खुले रखने का ऐला
ईरानी सशस्त्र बलों ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और किसी भी संभावित हमले का कड़ा जवाब देने की तैयारी पूरी कर ली है। क्षेत्रीय पड़ोसियों को आश्वस्त करते हुए ईरान ने कहा है कि अमेरिका-इजराइल गठबंधन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई केवल आत्मरक्षा का हिस्सा है, इसे किसी अन्य पड़ोसी देश पर हमला न माना जाए।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता, संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए ईरान के पास सभी विकल्प खुले हैं। अमेरिकी धमकियों और समुद्री नाकेबंदी का डटकर मुकाबला करने के लिए ईरानी सेना अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटी हुई है, जिससे मिडिल ईस्ट में शांति की बहाली फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आ रही है।











