कैप्टन स्मित के लिए इजरायली सिंगर ने गाई हनुमान चालीसा, VIDEO देख भावुक हुए लोग

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नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की कहानी अब भारत ही नहीं, विदेशों में भी चर्चा में है। मुश्किल घड़ी में उनके हौसले से प्रभावित होकर इजरायल के एक सिंगर ने उन्हें अनोखे अंदाज में सम्मान दिया है। सिंगर बेन रैविट्ज ने कैप्टन को समर्पित करते हुए हनुमान चालीसा गाई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

कठिन समय में हनुमान चालीसा से मिली हिम्मत 

दरअसल, फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट के दौरान कैप्टन स्मित मछार ने जिस सूझबूझ और हिम्मत से हालात को संभाला, उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। खुद कैप्टन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में बताया था कि उस कठिन समय में वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। इससे उन्हें मानसिक मजबूती और हिम्मत मिली।

कौन है सिंगर बेन रैविट्ज 

यही बात जब इजरायली सिंगर बेन रैविट्ज तक पहुंची तो उन्होंने इसे सिर्फ एक हादसे की खबर की तरह नहीं देखा, बल्कि विश्वास और हौसले की कहानी के तौर पर लिया। बेन भारतीय शास्त्रीय और भक्ति संगीत में काफी रुचि रखते हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर भारतीय भजनों की अपनी प्रस्तुतियां शेयर करते रहते हैं।

कैप्टन की कहानी सुनने के बाद उन्होंने हनुमान चालीसा रिकॉर्ड की और इसे कैप्टन मछार को समर्पित कर दिया। इसे उनके प्रति सम्मान और जल्द स्वस्थ होने की कामना के रूप में देखा जा रहा है। इस वीडियो की सबसे खास बात यह है कि एक भारतीय धार्मिक रचना को एक इजरायली कलाकार ने अपनी आवाज दी है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया।

वीडियो पर लोगों ने बरसाया प्यार 

वीडियो सामने आते ही भारत और इजरायल दोनों देशों के लोगों ने इस पर खूब प्यार बरसाया। कई यूजर्स ने लिखा कि एक व्यक्ति के साहस की कहानी कैसे दूसरे देश के व्यक्ति को भी प्रेरित कर सकती है, इसका यह बेहतरीन उदाहरण है। एक यूजर ने लिखा कि अच्छे काम की सकारात्मकता ऐसे ही आगे बढ़ती है, तो दूसरे ने कहा कि इस प्रस्तुति को सुनकर रोंगटे खड़े हो गए।

बेन रैविट्ज कोई बड़े पॉप स्टार नहीं हैं, लेकिन भारतीय संगीत के प्रति उनके लगाव ने उन्हें अलग पहचान दी है। इसलिए कैप्टन के लिए हनुमान चालीसा गाना सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच जुड़ाव का प्रतीक बन गया है। जहां कैप्टन के लिए हनुमान चालीसा मुश्किल वक्त में सहारा बनी, वहीं हजारों किलोमीटर दूर उसी चालीसा के जरिए उनके हौसले को सलाम किया गया।

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