कौन हैं 'इंग्लिश विद देहाती मैडम'? गांव से निकलकर बनीं इंटरनेट सेंसेशन, प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया वीडियो

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नई दिल्ली: कभी-कभी छोटी सी कोशिश बड़ी पहचान बन जाती है। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के कौशांबी की यशोदा लोढ़ी के साथ हुआ है, जिन्हें आज सोशल मीडिया पर ‘इंग्लिश विद देहाती मैडम’ के नाम से जाना जाता है। गांव की साधारण जिंदगी से निकलकर उन्होंने न सिर्फ खुद अंग्रेजी सीखी, बल्कि अब हजारों लोगों को आसान भाषा में इंग्लिश सिखा रही हैं।

कहां की रहने वाली है यशोदा कौशांबी 

यशोदा कौशांबी जिले के सिराथू नगर पंचायत के लोधन का पुरवा गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। अंग्रेजी उनके लिए शुरू में बहुत मुश्किल थी। खुद यशोदा बताती हैं कि उन्हें अंग्रेजी बोलनी नहीं आती थी और समझ नहीं आता था कि शुरुआत कहां से करें। फिर उन्होंने अपना ही तरीका निकाला लिया। वह दूसरों के वीडियो सुनतीं और उनमें बोले गए शब्दों को दोहराकर बोलने की प्रैक्टिस करती थी।

15 दिन बाद खुद बोलना शुरू किया इग्लिंश 

लगभग 15 दिन तक लगातार सुनने के बाद उन्होंने खुद बोलना शुरू किया और फिर यूट्यूब चैनल बना लिया। 26 दिसंबर 2023 को उन्होंने अपना चैनल शुरू किया था। उनका फोकस भारी-भरकम ग्रामर पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा में बोली जाने वाली आसान अंग्रेजी पर रहा। यही अंदाज लोगों को पसंद आया। शुरुआत में उनके पति को भी भरोसा नहीं था कि यूट्यूब से कमाई होगी, लेकिन यशोदा ने हार नहीं मानी। मेहनत रंग लाई और उनका चैनल करीब एक महीने में ही मोनेटाइज हो गया, अगले महीने पहली पेमेंट भी आ गई।

नहीं ली कोई भी प्रोफेशनल ट्रेनिंग 

यशोदा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सुना, समझा और प्रैक्टिस किया, वही अपने वीडियो में सिखाने लगीं। उनके वीडियो में छोटे-छोटे वाक्य और रोजमर्रा के शब्द होते हैं, जो उन लोगों के लिए भी आसान हैं जो ग्रामर से घबराते हैं।

प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया 

उनके लिए सबसे बड़ा दिन तब आया जब बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने उनका एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। यशोदा ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ऐसा होगा। यह उनके लिए सिर्फ एक शाउट-आउट नहीं, बल्कि गांव से शुरू हुए उनके सफर की सबसे बड़ी पहचान है। उसी दिन उनके इंस्टाग्राम पर 4 लाख फॉलोअर्स भी पूरे हो गए।

बता दें, यशोदा खुद को गर्व से ‘देहाती मैडम’ कहती हैं। यह नाम उनके लिए कमी नहीं, बल्कि उनकी जड़ों से जुड़ी पहचान है। 12वीं पास एक गांव की महिला की यह कहानी बताती है कि अगर कोशिश सच्ची हो तो छोटा सा प्रयास भी आपको बड़ी मंजिल तक पहुंचा सकता है।

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