नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग तेज हो गई है. छात्रों के प्रदर्शन और लगातार उठते सवालों ने सरकार के सामने यह चुनौती रख दी है कि परीक्षा प्रणाली से लेकर पढ़ाई के तरीके तक, पूरे एजुकेशन सिस्टम में भरोसा कैसे वापस लाया जाए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने शिक्षा सुधारों के लिए एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है. इस टास्क फोर्स की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को दी गई है. वहीं, शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी के पास है. ऐसे में दोनों के सामने कई बड़े सुधारों को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी.
टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल?
सरकार की ओर से बनाई गई इस टास्क फोर्स में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को शामिल किया गया है. इसमें शामिल प्रमुख नाम हैं:
नंदन नीलेकणी
पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ
पूर्व IB प्रमुख तपन डेका
पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
IIT मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी
वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा
छात्रों का भरोसा वापस जीतना सबसे बड़ी चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के कई मामलों ने छात्रों के भरोसे को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इसका असर देशभर में हुए छात्र आंदोलनों में भी दिखाई दिया. जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी चिंताएं सामने रखीं. अब नए शिक्षा मंत्री और टास्क फोर्स के सामने सबसे पहली चुनौती युवाओं का भरोसा वापस हासिल करने की होगी. छात्रों को यह विश्वास दिलाना होगा कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी है और सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर है. इसके लिए केवल घोषणाएं काफी नहीं होंगी, बल्कि सुधारों का असर जमीन पर भी दिखाई देना जरूरी होगा.
डिग्री नहीं, स्किल पर बढ़ाना होगा फोकस
शिक्षा व्यवस्था के सामने दूसरी बड़ी चुनौती डिग्री और रोजगार से जुड़े कौशल के बीच संतुलन बनाने की है. दुनिया भर में अब केवल डिग्री हासिल करने के बजाय छात्रों को व्यावहारिक कौशल देने पर जोर बढ़ रहा है. भारत में भी ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है, जिसमें छात्र पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के लिए जरूरी स्किल भी सीखें. इसके लिए स्कूल स्तर से ही बदलाव शुरू करना होगा. ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों तक भी आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास के अवसर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होगी.
बड़े स्तर की परीक्षाओं को बनाना होगा लीक प्रूफ
भारत में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं. इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली तैयार करना आसान नहीं है. पेपर लीक और नकल की संभावनाओं को खत्म करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना होगा. पारंपरिक OMR आधारित व्यवस्था में सुधार के साथ डिजिटल और AI आधारित मूल्यांकन प्रणाली पर भी विचार किया जा सकता है. हालांकि, इतनी बड़ी व्यवस्था को सुरक्षित, पारदर्शी और सभी छात्रों के लिए समान बनाना टास्क फोर्स के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी.
इन विशेषज्ञों के अनुभव का इस्तेमाल परीक्षा व्यवस्था, तकनीक, सुरक्षा और शिक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दों पर सुझाव तैयार करने के लिए किया जाएगा
छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करना
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ रहा है. कोटा और मुखर्जी नगर जैसे शिक्षा केंद्रों में बड़े कोचिंग संस्थानों का प्रभाव इस दबाव को और बढ़ाता है. कई छात्र लंबे समय तक पढ़ाई, प्रतियोगिता और असफलता के डर से मानसिक तनाव का सामना करते हैं. इसलिए शिक्षा सुधारों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी अहम जगह देनी होगी.
केवल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी पर आधारित व्यवस्था के बजाय छात्रों को बेहतर और समान अवसर देने की जरूरत है. यह तभी संभव होगा, जब छोटे शहरों और गांवों में भी अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध हो. अगर छात्रों को बेहतर पढ़ाई के लिए महंगी कोचिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, तो प्रतियोगिता का दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है.
मार्किंग और रिजल्ट सिस्टम में तकनीकी सुधार
हाल ही में CBSE के OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर भी सवाल उठे थे. मूल्यांकन और रिजल्ट से जुड़ी तकनीकी समस्याओं ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की कमियों को सामने ला दिया. अब नए शिक्षा मंत्री और टास्क फोर्स के सामने यह चुनौती होगी कि मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाया जाए. छात्रों की मेहनत का सही मूल्यांकन हो और रिजल्ट जारी करने में किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी न हो, इसके लिए पूरे सिस्टम को मजबूत करना होगा.












