नई दिल्ली: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीशू आजाद के पिता से कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज पर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब उनके समर्थन में भी प्रदर्शन शुरू हो गया है। बता दें, दिल्ली में हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने स्वतंत्र के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और प्रदर्शन की अगुवाई दक्ष चौधरी ने अपने समर्थकों के साथ की हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज पर लगाए गए गंभीर आरोप सही नहीं हैं और उन पर दबाव में केस दर्ज किया गया है। उनका दावा है कि पुलिस की जांच में ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए एससी/एसटी एक्ट, धारा 307 और पॉक्सो एक्ट जैसी धाराएं नहीं लगाई जानी चाहिए थीं। प्रदर्शनकारी पुलिस से मामले की दोबारा समीक्षा करने और स्वतंत्र के खिलाफ दर्ज धाराओं को हटाने की मांग कर रहे हैं।
23 जून को क्या हुआ था?
बता दें, पूरा विवाद 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। यहां नीशू आजाद के पिता और स्वतंत्र भारद्वाज के बीच कथित तौर पर मारपीट हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, नीशू का आरोप था कि केस दर्ज होने के बावजूद स्वतंत्र के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
मामले ने तब दोबारा जोर पकड़ा, जब एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने जंतर-मंतर की घटना पर बात की। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर नीशू के पिता पर हमला करने की बात स्वीकार की थी। पॉडकास्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई। वीडियो सामने आने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने नीशू आजाद का समर्थन किया और स्वतंत्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इसके बाद पुलिस ने स्वतंत्र के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया हैं।
नेताओं से संबंध का भी किया था दावा
पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने यह भी दावा किया था कि घटना के बाद उनके खिलाफ पहले कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि उनके कई नेताओं से अच्छे संबंध हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने चिराग पासवान और दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा का नाम लिया और दोनों को अपना बड़ा भाई बताया। अब स्वतंत्र के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और उसके विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन के बाद यह मामला एक बार फिर दिल्ली में चर्चा का विषय बन गया है।












