नई दिल्ली: कश्मीरी गेट इलाके में नीली छतरी मंदिर अंडरपास के पास ई-रिक्शा रोककर नकदी लूटने और विरोध करने पर एक व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या करने के मामले में उत्तर जिला पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक वारदात के पीछे मृतक का अपना चचेरा भाई भी शामिल था। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि 16 वर्षीय एक किशोर को भी पकड़ा गया है। वारदात के बाद फरार तीन अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान ज्वाइंट सीपी सेंट्रल रेंज मधुर वर्मा ने बताया कि नॉर्थ जिले की निहारिका भट्ट की निगरानी में नॉर्थ जिला पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंचने के लिए 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, एएनपीआर कैमरों और तकनीकी निगरानी का सहारा लिया गया। जांच के दौरान फर्जी नंबर प्लेट लगी मारुति स्विफ्ट कार सामने आई, जिसने पुलिस को वारदात की कड़ियों को जोड़ने में अहम सुराग दिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 लाख 29 हजार 800 रुपये की नकदी बरामद करने का दावा किया है।
दुकानों से पेमेंट लेकर लौट रहे थे चाचा-भतीजा
पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर की शाम करीब 7:20 बजे मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी शिकायतकर्ता सचिन अपने चाचा प्रभात के साथ गांधी नगर मार्केट की दुकानों से भुगतान की रकम लेकर ई-रिक्शा से लौट रहे थे। ई-रिक्शा जब सलिमगढ़ किले के पीछे नील छत्री मंदिर अंडरपास के पास पहुंचा, तभी चार बदमाशों ने वाहन को रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने प्रभात के पास मौजूद नकदी से भरी पॉलीथिन छीनने की कोशिश की। प्रभात ने विरोध किया तो बदमाशों ने चाकुओं से उन पर हमला कर दिया। इस दौरान सचिन और एक अन्य यात्री पर भी हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल प्रभात को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में कश्मीरी गेट थाने में एफआईआर संख्या 436/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
अंधेरे में दिखी तेज रफ्तार स्विफ्ट ने खोला पहला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर जिला पुलिस ने जांच के लिए संयुक्त टीमें गठित कीं। घटनास्थल और आसपास के रास्तों के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया। इसी दौरान पुलिस को एक मारुति स्विफ्ट कार दिखाई दी, जो अंडरपास के पास तेज रफ्तार में अचानक यू-टर्न लेकर सलिमगढ़ किले की तरफ जाती नजर आई। रात का अंधेरा और कैमरे से दूरी अधिक होने के कारण शुरुआत में कार की पहचान आसान नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को एएनपीआर कैमरों और तकनीकी निगरानी से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई। जिस नंबर की पहचान हुई, उसकी जांच में सामने आया कि वह नंबर नोएडा निवासी भगत सिंह के नाम पंजीकृत वाहन का था। लेकिन सीसीटीवी में दिखाई दे रही कार अलग निकली। इससे पुलिस को साफ संकेत मिला कि वारदात में फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया गया था।
150 कैमरों ने जोड़ी कड़ियां
इसके बाद अंडरपास और आसपास के मार्गों पर लगे करीब 150 कैमरों की फुटेज को विस्तार से खंगाला गया। फुटेज में वारदात से करीब दो घंटे पहले उत्तर प्रदेश नंबर वाली एक कार यमुना की तरफ से लोहे के पुल के रास्ते अंडरपास की ओर आती दिखाई दी। कार में पांच से छह लोग सवार थे। अलग-अलग स्थानों के कैमरों की फुटेज को जोड़ते हुए पुलिस ने वाहन और उसमें सवार संदिग्धों की पहचान की। जांच में सामने आया कि इस्तेमाल की गई मारुति स्विफ्ट झांसी निवासी दीपु के नाम पंजीकृत थी।
सीडीआर ने पहुंचाया मृतक के चचेरे भाई तक
पुलिस ने दीपु के मोबाइल नंबरों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच शुरू की। इसी दौरान एक मोबाइल नंबर संदिग्ध पाया गया, जो मृतक प्रभात और दीपु दोनों के संपर्क में था। तकनीकी जांच में इस नंबर का इस्तेमाल कानपुर निवासी ओम सिंह द्वारा किए जाने की बात सामने आई। जांच की दिशा बदल गई और पुलिस टीम कानपुर पहुंची। वहां से मृतक प्रभात के चचेरे भाई ओम सिंह को पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में ओम ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने प्रभात की गतिविधियों और नकदी लेकर आने-जाने की जानकारी राज और दीपु के साथ साझा की थी।
यूपी के तीन शहरों में पुलिस की दबिश
ओम से पूछताछ और आगे की तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस टीमों ने कानपुर, झांसी और इटावा में दबिश दी। झांसी से दीपु और एक 16 वर्षीय किशोर को पकड़ा गया, जबकि एक अन्य आरोपी अभिषेक को इटावा से गिरफ्तार किया गया, जहां वह कथित तौर पर छिपा हुआ था। पुलिस के अनुसार इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक नोएडा में रची गई थी साजिश
पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस का दावा है कि ओम ने मृतक प्रभात की नकदी संबंधी गतिविधियों की जानकारी आरोपियों को दी थी। इसके बाद दीपु कथित तौर पर अपने गांव से रोहित यादव और एक किशोर को लेकर आया, जबकि राज और ओम ने कथित तौर पर अनिरुद्ध चौहान और अभिषेक से संपर्क किया।।पुलिस के अनुसार आरोपियों ने नोएडा में कथित तौर पर साजिश को अंतिम रूप दिया। इसके बाद दीपु की मारुति स्विफ्ट से आरोपी अंडरपास की तरफ पहुंचे, जबकि अभिषेक कथित तौर पर मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा। जांच में यह भी सामने आया कि मृतक प्रभात पहले से अनिरुद्ध चौहान को जानता था। पुलिस के अनुसार प्रभात की अनिरुद्ध से पहचान ओम के गांव में हुई थी, जहां वह ओम के परिवार से मिलने जाता था।
वारदात के बाद बंट गई लूटी रकम
पुलिस के मुताबिक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी नोएडा पहुंचे, जहां कथित तौर पर लूटी गई रकम आपस में बांटी गई। इसके बाद सभी आरोपी अलग-अलग स्थानों की ओर निकल गए, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल 2,29,800 रुपये बरामद किए हैं। इनमें अभिषेक से 1.10 लाख रुपये, दीपु राठौर से 19,800 रुपये और किशोर से 1 लाख रुपये बरामद होने की बात कही गई है।
गिरफ्तार आरोपियों का ब्यौरा
ओम सिंह उम्र 21 वर्ष निवासी चंदनीवाड़ा रतनपुर थाना रसूलाबाद कानपुर उत्तर प्रदेश, दीपु राठौर उम्र 28 वर्ष निवासी कैरोकहर झांसी उत्तर प्रदेश के तौर पर हुई।पुलिस के अनुसार वह उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म, पॉक्सो, हत्या के प्रयास जबरन वसूली, दंगा तथा गुंडा और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में पूर्व में शामिल रहा है।अभिषेक उम्र 24 वर्ष, निवासी समयूं, रसूलाबाद कानपुर उत्तर प्रदेश इसके अलावा 16 वर्षीय किशोर को भी पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार उसका पूर्व में दुष्कर्म पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में नाम सामने आया है।
अब बाकी तीन आरोपियों की तलाश
डीसीपी निहारिका भट्ट ने बताया कि इस पूरी साजिश में शामिल तीन आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश में अलग-अलग टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि पूरी वारदात में किस आरोपी की क्या भूमिका थी बाकी लूटी गई रकम कहां है और वारदात में इस्तेमाल अन्य सामान व साक्ष्य कहां छिपाए गए हैं।
जिन टीमों ने जोड़ी वारदात की कड़ियां
पूरी कार्रवाई डीसीपी उत्तर जिला निहारिका भट्ट अतिरिक्त डीसीपी-I पुखराज कमल गुप्ता और अतिरिक्त डीसीपी-II राम दलेश मीणा की समग्र निगरानी में की गई। पहली टीम का मार्गदर्शन एसीपी कोतवाली शंकर बनर्जी ने किया। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रशांत यादव एसएचओ कश्मीरी गेट ने किया। टीम में इंस्पेक्टर सतेंद्र, इंस्पेक्टर प्रदीप उपनिरीक्षक मुकेश और उपनिरीक्षक निशांत शामिल रहे।
दूसरी टीम का मार्गदर्शन एसीपी ऑपरेशन उत्तर विशेष स्टाफ विशेष धत्तरवाल ने किया। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर रोहित सारस्वत प्रभारी विशेष स्टाफ ने किया। टीम में हेड कांस्टेबल आकाश, हेड कांस्टेबल देवेंद्र, हेड कांस्टेबल संदीप, हेड कांस्टेबल रामबाबू, हेड कांस्टेबल संदीप, हेड कांस्टेबल अमित, हेड कांस्टेबल रहीस, कांस्टेबल रवि, कांस्टेबल कुलदीप, कांस्टेबल सचिन, कांस्टेबल विक्की, कांस्टेबल कासिम, कांस्टेबल मोहित श्योराण, कांस्टेबल मोहित, कांस्टेबल पुरन और कांस्टेबल नितिन शामिल रहे।











