नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में भले ही सीधे हमले थमे हुए दिख रहे हों, लेकिन दुनिया के सबसे अहम तेल रूट होर्मुज स्ट्रेट को लेकर टकराव और तेज हो गया है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और अब ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी 7 शर्तें नहीं मानी जातीं, वह इस रास्ते को नहीं खोलेगा। वहीं दूसरी तरफ इस इलाके में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने क्या कहा?
रॉयटर्स ने ईरान की नूरन्यूज के हवाले से बताया है कि ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ जून में हुए अंतरिम समझौते में तय की गई 7 शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा। यह बयान तब आया है जब कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने एक मध्यस्थ के जरिए ईरान को नया प्रस्ताव भेजा था।
गलिबाफ ने कहा, “अमेरिका मीडिया में कुछ और कहता है और पर्दे के पीछे प्रस्ताव कुछ और भेजता है। उन्हें समझना होगा कि बात को लंबा खींचने और एकतरफा शर्तें थोपने का वक्त खत्म हो गया है।” उन्होंने दोहराया कि ईरान का रुख बिल्कुल साफ है, इस्लामाबाद में हुए समझौता ज्ञापन में लिखी 7 शर्तों पर अमल हुए बिना होर्मुज नहीं खुलेगा।
क्या है ईरान की 7 शर्तें?
ईरान द्वारा अमेरिका के सामने रखी गई सात प्रमुख शर्तों पर गैर करें तो इनमें सैन्य कार्रवाइयों पर पूर्ण विराम, समुद्री नाकाबंदी खत्म करना और जब्त या फ्रीज किए गए ईरानी फंड को जारी करना शामिल है। इसके अलावा ईरान अपने तेल और ऊर्जा निर्यात पर लगी पाबंदियों में छूट, अपने संप्रभु अधिकारों की मान्यता और इस्लामाबाद समझौते की शर्तों के पालन की मांग कर रहा है। सातवीं शर्त के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर एकतरफा दबाव रोकने की मांग की है। इन शर्तों के जरिए तेहरान ने तनाव कम करने और बातचीत के लिए अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं।
7 दिन में खुल सकता है रास्ता?
संसद अध्यक्ष के अलावा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी रविवार को अलग बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान की शर्तों को मान लेता है तो 7 दिन के अंदर होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोल दिया जाएगा। तेहरान में विदेशी राजदूतों से बात करते हुए अराघची ने कहा कि ईरान ने अपनी सभी शर्तें साफ तौर पर बता दी हैं और ये सभी उन वादों से जुड़ी हैं जिन्हें अमेरिका को मानना होगा।
उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर अमेरिका ने फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना तो ईरान जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अराघची ने कहा, “हमें उम्मीद है वाशिंगटन कूटनीति चुनेगा, लेकिन अगर वह फिर जंग की तरफ गया तो हम पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं और अपनी हिफाजत के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।”
तेल के दाम 100 डॉलर के पार
बता दें, दोनों देशों के बीच इस तनातनी का असर कच्चे तेल के बाजार पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है, WTI क्रूड करीब 92 डॉलर और मर्बन क्रूड 110.8 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।












