नई दिल्ली: सड़क पर रफ्तार का रोमांच अक्सर जिंदगी पर भारी पड़ जाता है लेकिन अगर ट्रैफिक नियमों को आदत बना लिया जाए तो कई हादसों को टाला जा सकता है। इसी संदेश को लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की उत्तरी रेंज टीम ने जागरूकता की ऐसी ‘फिल्म’ दिखाई, जिसमें कलाकारों की जगह संदेश था और कहानी का नायक था सड़क सुरक्षा।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की उत्तरी रेंज टीम ने 5 अक्टूबर को नरेला ट्रैफिक सर्किल के अंतर्गत बख्तावरपुर स्थित मदर खजानी स्कूल में सड़क सुरक्षा जागरूकता को लेकर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। कार्यक्रम का आयोजन डीसीपी ट्रैफिक उत्तरी रेंज डॉ. सचिन कुमार सिंघल के निर्देशन और पर्यवेक्षण में सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से किया गया।
300 छात्रों ने सीखा ‘सड़क सुरक्षा का फॉर्मूला’
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्कूल के करीब 300 छात्रों को यातायात नियमों के महत्व और सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार के बारे में जागरूक किया गया। मनोरंजन और संवाद के जरिए छात्रों को यह समझाया गया कि सड़क पर छोटी-सी लापरवाही भी कभी-कभी जिंदगी की सबसे बड़ी कीमत वसूल सकती है। नाटक के दौरान बच्चों को दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनने कार में सफर करते समय सीट बेल्ट लगाने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने और शराब पीकर वाहन नहीं चलाने का संदेश दिया गया।इसके साथ ही ट्रैफिक सिग्नल का पालन करने अपनी लेन में चलने और सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
नाटक में दिखा लापरवाही का ‘क्लाइमेक्स’
नुक्कड़ नाटक को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि छात्र सड़क पर होने वाली आम गलतियों और उनके गंभीर परिणामों को आसानी से समझ सकें। कलाकारों ने अभिनय और संवादों के जरिए बताया कि यातायात नियम केवल चालान से बचने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये जिंदगी बचाने के लिए बनाए गए हैं। छात्रों को खास तौर पर समझाया गया कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर एक नजर भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी तरह हेलमेट और सीट बेल्ट को महज औपचारिकता समझने की बजाय जीवनरक्षक सुरक्षा कवच के रूप में अपनाना चाहिए।
सड़क सुरक्षा बनी ‘हीरो’ जागरूकता बनी हथियार
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। ट्रैफिक पुलिस टीम ने छात्रों को संदेश दिया कि सड़क पर सुरक्षित व्यवहार केवल चालक की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। स्कूल प्रशासन ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों तक सड़क सुरक्षा का संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज की समझदारी, कल की जिंदगी
उत्तरी रेंज ट्रैफिक टीम ने साफ संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा का अभियान केवल नियम बताने तक सीमित नहीं है। जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी के जरिए लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना भी उतना ही जरूरी है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की उत्तरी रेंज आने वाली पीढ़ी में सड़क सुरक्षा की संस्कृति विकसित करने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। क्योंकि सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार आज अपनाया जाएगा, तो कल किसी परिवार का चिराग बुझने से बचाया जा सकेगा।












