नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में मंगलवार को निर्वाचन आयोग की ओर प्रस्तावित मार्च को लेकर सियासी माहौल उस समय गरमा गया, जब इंडी गठबंधन के प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन से निर्वाचन आयोग की ओर कूच किया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक मार्च के लिए नई दिल्ली जिला पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बावजूद सुबह करीब साढ़े दस बजे प्रदर्शनकारी आगे बढ़े और देखते ही देखते पुलिस बैरिकेड तक पहुंच गए। इसके बाद शुरू हुआ बैरिकेड टूटने पुलिस की चेतावनी और प्रदर्शनकारियों को निरुद्ध किए जाने का सिलसिला।
दिल्ली पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया के माध्यम से उसे जानकारी मिली थी कि इंडी गठबंधन द्वारा संसद भवन से निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च निकाला जाएगा। प्रस्तावित मार्च के लिए उपायुक्त पुलिस नई दिल्ली जिला के कार्यालय में अनुमति का कोई आवेदन नहीं दिया गया था। लिहाजा मार्च के लिए पुलिस की ओर से कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई थी।
प्रस्तावित जमावड़े और नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा को देखते हुए पुलिस ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ की आवाजाही नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
पहला बैरिकेड टूटा तो बढ़ा तनाव
सुबह करीब 10:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने मार्च शुरू किया। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में लगाए गए पहले बैरिकेड को तोड़ दिया और आगे बढ़ते हुए नीति आयोग के पास लगाए गए दूसरे बैरिकेड तक पहुंच गए। मौके पर पुलिस ने बार-बार घोषणा कर प्रदर्शनकारियों को धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों की जानकारी दी और शांतिपूर्वक वापस लौटने की अपील की। लेकिन पुलिस का कहना है कि बार-बार अपील के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने निर्देशों का पालन नहीं किया और मौके पर डटे रहे। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कानून के अनुसार प्रदर्शनकारियों को निरुद्ध करने की कार्रवाई शुरू की।
260 लोग निरुद्ध, 10 सांसद भी शामिल
दिल्ली पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान करीब 260 लोगों को निरुद्ध किया गया, जिनमें लगभग 10 सांसद भी शामिल हैं। निरुद्ध किए गए लोगों को दिल्ली के अलग-अलग पुलिस थानों में ले जाया गया जहां उनके संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।अधिकांश प्रदर्शनकारियों के वहां से चले जाने के बाद भी सियासी तस्वीर पूरी तरह शांत नहीं हुई। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, मनीष छत्रथ सहित करीब 50 से 60 समर्थक बिना अनुमति के आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर वहां बैठ गए।
आकाशवाणी परिसर बना सियासी ‘क्लाइमेक्स’
मामला उस समय और दिलचस्प हो गया जब राहुल गांधी ने आकाशवाणी परिसर से बाहर जाने से इनकार कर दिया। पुलिस के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि जब तक सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को निर्वाचन आयोग से मिलने का समय नहीं दिया जाता तब तक वह वहां से नहीं जाएंगे। इसके बाद आकाशवाणी परिसर में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति को लेकर गतिरोध बना रहा। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाने की कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई के दौरान राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित अन्य प्रदर्शनकारियों को भी परिसर से हटाया गया और आवश्यकतानुसार निरुद्ध किया गया। पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून के अनुरूप की गई और इस दौरान सार्वजनिक सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
दिल्ली पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस ने कहा कि पूरे क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की व्यवस्था की गई है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस ने सभी संबंधित लोगों से शांति बनाए रखने और पुलिस द्वारा दिए जा रहे वैध निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राजधानी में दिनभर चले इस घटनाक्रम में सड़क पर निकला मार्च पहले बैरिकेड पर टकराया फिर दूसरा बैरिकेड पार करने की कोशिश हुई और आखिरकार आकाशवाणी परिसर तक पहुंचा सियासी प्रदर्शन पुलिस की कार्रवाई के साथ खत्म हुआ। मार्च की शुरुआत नारों से हुई बैरिकेड पर टकराव हुआ और आकाशवाणी परिसर में पहुंचकर सियासी ड्रामे का क्लाइमेक्स सामने आया।












