नई दिल्ली: पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार ने प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर रूल लगाने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में रविवार सुबह हुई फेडरल कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को संविधान के आर्टिकल 232 और 234 के तहत यह कदम उठाने की सलाह दी गई है।
गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि केपी में हालात हाथ से निकल चुके हैं। खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मार्च 2024 के बाद से प्रांत में आतंकी घटनाओं में 195 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। केंद्र का आरोप है कि पीटीआई की प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ संघीय रणनीति में सहयोग नहीं कर रही और जानबूझकर निर्देशों को नजरअंदाज कर रही है। इसी वजह से कैबिनेट को सख्त कदम उठाना पड़ा।
सीएम सोहेल अफरीदी ने दी खुली चुनौती
दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने केंद्र को खुली चुनौती दे दी है। उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत है तो खुलेआम इमरजेंसी लगाकर दिखाओ। उन्होंने इस फैसले को प्रांत के अधिकारों पर हमला बताया। पीटीआई की कोर कमेटी ने भी कैबिनेट के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है।
अफरीदी ने चीफ सेक्रेटरी और पुलिस चीफ को आदेश दिया है कि इस्लामाबाद से आने वाले किसी भी गैर-कानूनी आदेश को न माना जाए। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियां, धमकियां और सुरक्षा हटाने के बावजूद उनका लॉन्ग मार्च नहीं रुकेगा और काफिला आगे बढ़ता रहेगा। 13 अक्टूबर को स्वाबी इंटरचेंज पर आगे की रणनीति का ऐलान किया जाएगा।
पेशावर में रास्तों को किया गया सील
पेशावर में हालात तनावपूर्ण हैं। हाई सिक्योरिटी कैंटोनमेंट एरिया के आसपास के रास्तों को कंटेनर लगाकर सील कर दिया गया है। जीटी रोड पर ट्रैफिक रोक दिया गया है। फिरदौस और बाला हिसार किले के पास बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि कोई बड़ी सभा न हो सके। बताया जा रहा है कि जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने आखिरी वक्त पर बीच-बचाव की कोशिश की थी और प्रधानमंत्री से बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कैबिनेट ने सिफारिश पर मुहर लगा दी। अब सबकी नजर राष्ट्रपति के फैसले पर टिकी है।












