
नई दिल्ली: नवरात्र और डांडिया नाइट्स का जोश थमते ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चनिया-चोली और लहंगों के रिटर्न की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें डिलीवरी एजेंट अपने वाहन और वेयरहाउस में लगे कपड़ों के ढेर दिखाते हुए हंस रहे हैं। फेस्टिवल खत्म होते ही पारंपरिक आउटफिट्स के पार्सल वापस आने लगे हैं।
एक्स पर वायरल हुआ डिलीवरी एजेंट का वीडियो
एक्स पर @Nishantchant नाम के हैंडल से एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें एक डिलीवरी बॉय कह रहा है कि डांडिया खत्म होते ही रिटर्न शुरू हो गए हैं। कई अन्य पोस्ट में भी एजेंट सैकड़ों लहंगे-चोली के पैकेट दिखा रहे हैं। इस पर यूजर्स जमकर कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "डांडिया खत्म… ड्रेस रिटर्न… शेमलेस जनरेशन।" कई लोगों का कहना है कि यह "वॉर्डरोबिंग" ट्रेंड है, जहां लोग महंगे कपड़े सिर्फ एक-दो दिन पहनकर वापस कर देते हैं।
Dandiya khatam … Dress return Shameless generation https://t.co/Jzqye1WZeV
— Nishant (@Nishantchant) October 16, 2026
त्योहार में क्यों बढ़ते हैं रिटर्न?
नवरात्र के दौरान गरबा-डांडिया के लिए चनिया-चोली और शरारों की डिमांड काफी बढ़ जाती है और कीमतें भी आसमान छूती हैं। आसान रिटर्न पॉलिसी का फायदा उठाकर कई लोग अलग-अलग साइज और डिजाइन ऑर्डर करते हैं, फंक्शन में पहनते हैं और फिर रिटर्न कर देते हैं। वैसे भी फैशन कैटेगरी में रिटर्न रेट 20 से 40 फीसदी तक रहता है, जो त्योहारों के बाद और बढ़ जाता है।
डिलीवरी एजेंट्स के लिए यह हंसी-मजाक के साथ-साथ अतिरिक्त काम का बोझ भी है। उन्हें इस्तेमाल किए हुए कपड़ों की जांच करनी पड़ती है और वापस भेजने की पूरी प्रक्रिया संभालनी पड़ती है।
ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती
सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे बजट में स्टाइलिश दिखने का स्मार्ट तरीका बता रहे हैं, तो कई इसे बेईमानी कह रहे हैं। इससे ब्रांड्स और डिलीवरी पार्टनर्स पर अतिरिक्त खर्च आता है, क्योंकि शिपिंग, इंस्पेक्शन और री-पैकेजिंग में लागत बढ़ती है और कभी-कभी कपड़े दोबारा बेचने लायक भी नहीं रहते।
इस समस्या से निपटने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां रिटर्न पॉलिसी सख्त करने और टैग चेकिंग पर जोर दे रही हैं। वहीं एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि लोग खरीदने की बजाय ड्रेस रेंट पर लें। कई शहरों में डांडिया आउटफिट किराए पर मिलते हैं, जो सस्ता होने के साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है।












