मथुरा: ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक संध्या में मंगलवार को भक्ति संगीत का अनूठा रंग देखने को मिला। धौली प्याऊ रेलवे ग्राउंड पर रूट्स: नादात्म बैंड की भजन क्लबिंग प्रस्तुति ने श्रोताओं को भक्ति के साथ आधुनिक संगीत की धुनों पर झूमने के लिए मजबूर कर दिया। पारंपरिक भजनों को नए संगीत संयोजन में सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति से लेकर श्रीराम के भजनों और भगवान शिव की आराधना तक, कलाकारों ने सुरों के माध्यम से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया।
गणेश वंदना से हुई शाम की शुरुआत
कार्यक्रम का आगाज गणेश वंदना और हनुमान चालीसा से हुआ। इसके बाद जैसे ही ‘मेरे बांके बिहारी लाल, ना करियो इतना शृंगार, नजर तोय लग जाएगी’ के स्वर गूंजे, पंडाल में मौजूद श्रोता भक्ति रस में डूब गए। ‘राधे अलबेली सरकार’, ‘राधिका गोरी से ब्रज की छोरी से’, ‘मेरे कान्हा ने बंसी बजाई’ और ‘मीठे रस से भरी रे राधा रानी लागे’ जैसे लोकप्रिय भजनों ने ब्रज की भक्ति परंपरा को जीवंत कर दिया। ड्रम, गिटार, कीबोर्ड, बांसुरी, तबला और ढोलक की संगत ने इन प्रस्तुतियों को नया अंदाज दिया। कलाकारों ने आधुनिक संगीत और पारंपरिक भजनों के तालमेल से ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक देर तक संगीत की लय में झूमते रहे।
राम भजन और शिव तांडव ने भरे विविधता के रंग
शाम की इस संगीतमय प्रस्तुति में केवल कृष्ण भक्ति ही नहीं, बल्कि राम और शिव की आराधना के स्वर भी सुनाई दिए। ‘श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में’, ‘राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी’ और ‘शिव तांडव’ की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विविधता के रंग भरे। वहीं, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘अच्युतम केशवम’, ‘काली कमली वाला मेरा यार है’ और ‘ऐगिरी नंदिनी’ जैसे भक्ति गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर किया। गायन की जिम्मेदारी कृष्णा शुक्ला, गौरव त्रिपाठी और सत्यराज मिश्रा ने संभाली। सार्थक रैकवार ने ड्रम, अमित हवेलिया ने बास गिटार, रितुल हजारिका ने लीड गिटार, हर्ष कुलपरिया ने बांसुरी, करण मूरजानी ने कीबोर्ड और अमन ने तबला एवं ढोलक पर संगत दी। आरव कान्हा शर्मा ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। राहिल शर्मा बैंड मैनेजर, अभिराज शर्मा समन्वयक और मांडवी राठौड़ कार्यक्रम की संचालक रहीं।
मेले में उमड़ रही भीड़, खरीदारी का ले रहे आनंद
ब्रजरज उत्सव के तहत धौली प्याऊ रेलवे ग्राउंड में लगा मेला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शाम होते ही यहां चहल-पहल बढ़ जाती है। खानपान के स्टॉलों पर विभिन्न शहरों के व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। बच्चे और युवा तरह-तरह के झूलों का आनंद ले रहे हैं, जबकि गोकुल ग्राम में सेल्फी लेने और यादगार पलों को कैमरे में कैद करने का सिलसिला जारी है। मेले में खादी और स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। कपड़े, हस्तशिल्प, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोग पहुंच रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मेले के खानपान, खरीदारी और मनोरंजन से जुड़े आकर्षण उत्सव की रौनक बढ़ा रहे हैं।












