नई दिल्ली: इंदौर के बहुचर्चित कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को शीर्ष अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को मिली राहत को समाप्त करते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी है और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त निर्देश जारी किया है. इसके अलावा, अदालत ने इस संवेदनशील मामले का ट्रायल अगले 6 महीनों के भीतर पूरा करने के आदेश दिए हैं.
तकनीकी गलती बनी थी जमानत का आधार
यह दुखद घटना मई 2025 की है, जब मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी राजा रघुवंशी अपनी शादी के बाद पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे. ईस्ट खासी हिल्स इलाके में राजा की हत्या कर दी गई, जिसके बाद जून 2025 में पुलिस ने पत्नी सोनम को हत्या की मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए गिरफ्तार कर लिया था.
बड़ी गलती
अप्रैल 2026 में ईस्ट खासी हिल्स की जिला एवं सत्र अदालत ने सोनम को इस तकनीकी आधार पर बेल दे दी थी कि पुलिस के अरेस्ट मेमो में धारा की टाइपिंग में चूक हुई थी. दस्तावेज में हत्या की वास्तविक धारा (103 बीएनएस) के बजाय गलती से ‘403 बीएनएस’ अंकित हो गया था. बाद में मेघालय हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के इस जमानत आदेश को सही ठहराया था.
सॉलिसिटर जनरल की दलीलें और सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अरेस्ट मेमो में एक मामूली लिपिकीय त्रुटि (टाइपोग्राफिकल एरर) के आधार पर इतने गंभीर अपराध की आरोपी को रिहा करना कानूनन गलत है. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि जमानत पर बाहर रहने से आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी तकनीकी खामी के बल पर जघन्य अपराध के मामलों में जमानत को बरकरार नहीं रखा जा सकता. पीठ ने सोनम को 21 दिनों में सरेंडर करने को कहा है. अदालत ने यह राहत भी दी है कि यदि 6 महीने में गवाहों के बयान और ट्रायल प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो आरोपी दोबारा बेल के लिए अर्जी लगा सकती है.












