छत्रपति मर्डर केस में राम रहीम को SC का नोटिस, 8 हफ्ते में मांगा जवाब

0
6
Ram Rahim
Ram Rahim

नई दिल्ली: साध्वी यौन शोषण और पत्रकार हत्याकांड के मामलों में जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की कानूनी अड़चनें एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगी हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अब देश की सर्वोच्च अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मृतक पत्रकार के परिजनों की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए राम रहीम और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दोनों को नोटिस जारी कर आठ हफ्तों के भीतर जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत की इस पहल से हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं और इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी पेंच फिर से फंसता दिख रहा है।

CBI की भूमिका पर उठे सवाल

सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि हाईकोर्ट द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील दाखिल नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू को रेखांकित करते हुए CBI और राम रहीम से स्पष्टीकरण मांगा है। 

अब सभी की निगाहें नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या हाईकोर्ट का फैसला कायम रहेगा या फिर राम रहीम को एक बार फिर इस गंभीर हत्याकांड में कानूनी शिकंजे का सामना करना पड़ेगा।

साल 2002 का वह खौफनाक दिन

सच्चाई को निर्भीकता से सामने लाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार अपराधियों ने ताबड़तोड़ गोलियां मार दी थीं। अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते हुए 21 नवंबर 2002 को उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद पीड़िता परिवार ने इंसाफ के लिए एक लंबी और मुश्किल कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसकी जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने वर्षों की तफ्तीश के बाद जनवरी 2019 में गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि हाईकोर्ट द्वारा राम रहीम को बरी किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील दाखिल नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती

यह पूरा मामला वर्ष 2002 में हुई वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की निर्मम हत्या से जुड़ा हुआ है। मार्च 2026 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए राम रहीम को इस हत्याकांड से बरी कर दिया था और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के तीन अन्य सह-आरोपियों की सजा को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान जस्टिस की पीठ ने माना कि इस संवेदनशील मामले में कानूनी विचार करने की आवश्यकता है, जिसके बाद उन्होंने आगामी सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह की तारीख तय की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here