‘ईरान को हराने के बाद अमेरिका के कब्जे में होगा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा उबाल ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा और विवादित बयान ने वैश्विक राजनीति को एक नए संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका के नागरिकों से अपील की कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यदि उन्हें ईंधन की थोड़ी अधिक कीमत चुकानी पड़े, तो इसे व्यापक वैश्विक सुरक्षा के हित में स्वीकार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईरान पर जीत हासिल करने के बाद रणनीतिक रूप से संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का विवादास्पद ऐलान कर दिया। ट्रंप की इस घोषणा पर तेहरान ने कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि होर्मुज पर किसी भी बाहरी देश का दावा कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ट्रंप की दलील और घरेलू राजनीति का दबाव

न्यू यॉर्क के गार्डेन सिटी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पेट्रोल पंपों पर अमेरिकियों को जो अतिरिक्त जेब ढीली करनी पड़ रही है, वह एक “बेहद खतरनाक देश” को परमाणु ताकत बनने से रोकने का आवश्यक मूल्य है।

ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ उठाए गए कदमों के लिए कभी माफी नहीं मांगेंगे। चुनाव के समय ऊर्जा दरें कम रखने के वादे और बढ़ती महंगाई के बीच लगभग $4 प्रति गैलन पहुंचे पेट्रोल के दामों ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में विपक्ष को तीखे हमले का मौका दे दिया है।

ईरान का करारा पलटवार

डोनाल्ड ट्रंप के क्षेत्रीय दावे पर ईरान ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी रुख की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर न तो किसी सोशल मीडिया पोस्ट या ट्वीट से कब्जा किया जा सकता है, न किसी विमानवाहक पोत की तैनाती से और न ही चुनावी रैलियों में दिए गए भाषणों से। गरीबाबादी ने जोर देकर कहा कि यह जलमार्ग ऐतिहासिक रूप से ईरान का था, है और हमेशा ईरान का ही रहेगा। 

क्यों खास है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। सैन्य हलचल या राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों पर पड़ता है। 

इस ताजा तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के दाम उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुके हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में नौवहन बाधित रहता है या सैन्य संघर्ष लंबा खींचता है, तो आने वाले दिनों में दुनिया को भीषण ऊर्जा संकट और चौतरफा महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने ईरान पर जीत हासिल करने के बाद रणनीतिक रूप से संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का विवादास्पद ऐलान कर दिया। ट्रंप की इस घोषणा पर तेहरान ने कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि होर्मुज पर किसी भी बाहरी देश का दावा कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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