मान सरकार का बड़ा कदम, स्कूलों से खत्म होगा नशा, 21,850 शिक्षक संभालेंगे छात्रों की मानसिक सेहत

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Bhagwant Mann Government
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चंडीगढ़: पंजाब की कक्षाओं में अब सिर्फ किताबों का पाठ नहीं पढ़ाया जाएगा, बल्कि बच्चों के मन की अंधी परतों में छिपे तनाव और भटकाव को भी गहराई से पढ़ा जाएगा। भगवंत मान सरकार ने राज्य में गहराती नशे की समस्या पर प्रहार करने और किशोर विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सहेजने के लिए एक बेहद संवेदनशील और जमीनी पहल की है। 

इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य अध्यापकों को इस काबिल बनाना है कि वे कक्षाओं में बच्चों के भीतर बदलते व्यवहार, अचानक गुमसुम रहने की आदत या नशे की तरफ बढ़ते शुरुआती कदमों को वक्त रहते भांप सकें।

सहानुभूति से ही संभव है समाधान

अक्सर देखा जाता है कि जब कोई किशोर मन मानसिक तनाव या नशे की गिरफ्त में आने लगता है, तो उसका बदला हुआ व्यवहार स्कूलों में अनुशासनहीनता मान लिया जाता है। दंड की यही प्रक्रिया बच्चे को समाज और पढ़ाई से और दूर धकेल देती है। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि हर वो बच्चा जो नशे की अंधेरी राह पर निकल जाता है, असल में एक ऐसा जीवन है जिसे हम सही समय पर थाम सकते थे।

शिक्षकों की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता के बाद अध्यापक ही बच्चों के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताते हैं। वे बच्चों की खामोशी, उनकी अनुपस्थिति और उनके स्वभाव में आने वाले सूक्ष्म बदलावों को सबसे पहले महसूस कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण अध्यापकों को सजा देने के बजाय संवेदनशीलता के साथ मदद का हाथ बढ़ाने का हुनर सिखाएगा, ताकि कोई भी मासूम बच्चा बिना किसी सामाजिक कलंक के डर के अपनी बात साझा कर सके।

500 से अधिक बैचों में दिया जाएगा शिक्षण

इस अभियान की मजबूत नींव हाल ही में फाजिल्का और तरनतारन से रखी जा चुकी है, जहां 800 से अधिक अध्यापकों ने कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। इससे पूर्व अमृतसर में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट में 2,800 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया था, जिसके बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए थे।

अब इस मॉड्यूल का दायरा बढ़ाते हुए इसे फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला में लागू किया जा रहा है। अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से 500 से अधिक प्रशिक्षण बैच आयोजित किए जाएंगे।

विभागीय तालमेल से बनेगी मजबूत निगरानी व्यवस्था

यह अभियान केवल एक औपचारिक कार्यशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतर-विभागीय समन्वय की एक अनूठी मिसाल है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग तथा डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (DITSU) मिलकर इस प्रशिक्षण की गुणवत्ता तय कर रहे हैं।

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