54 हजार परिवारों का डेटा, छात्रवृत्ति के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खेल बेनकाब

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नई दिल्ली: उच्च शिक्षा के सपने देखने वाले छात्रों और उनके परिवारों को छात्रवृत्ति का लालच देकर ठगी करने वाले साइबर गिरोह का पूर्वी जिला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। तमिलनाडु के तमिल भाषी परिवारों को निशाना बनाने वाले इस कथित नेटवर्क के दो आरोपियों सचिन शर्मा (29) और सुमित को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सैमसंग एस-26 मोबाइल फोन बरामद हुआ है। जिसकी जांच में करीब 54 हजार लोगों के संपर्क विवरण वाली एक्सेल फाइलें मिली हैं। हैरानी की बात यह है कि इस विशाल सूची में शिकायतकर्ता का नंबर भी शामिल था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

17,989 रुपये से खुला ठगी के साम्राज्य का राज

पूर्वी जिला डीसीपी राजीव कुमार रावल ने बताया कि मामले की शुरुआत तमिलनाडु निवासी मुथु कुमार की शिकायत से हुई। आरोप है कि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दिलाने का झांसा दिया गया और एक सितंबर 2026 को ऑनलाइन 17989 रुपये जमा करा लिए गए। पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। बैंक खातों की जांच में ठगी की रकम बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते तक पहुंची, जहां से पूर्वी दिल्ली के एटीएम के जरिए नकदी निकाली गई। इसके बाद साइबर थाना पूर्वी में प्राथमिकी संख्या 79/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 112(2)/318(4) के तहत जांच शुरू हुई।

बहन का बैंक खाता बना ठगी की रकम का रास्ता

जांच के दौरान बैंक दस्तावेजों और एटीएम की सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि खाता शिवानी शर्मा के नाम पर था। फुटेज में नकदी निकालता दिखाई दिया युवक उसका भाई सचिन शर्मा निकला। पुलिस के अनुसार, सचिन ने अपनी बहन का एटीएम कार्ड और यूपीआई की जानकारी कमीशन के बदले सुमित को दी थी। सचिन को 17 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर 10 हजार रुपये निकालने, 8 हजार रुपये यूपीआई से भेजने और 3 हजार रुपये कमीशन मिलने की बात बताई। उसके खुलासे पर सुमित को 21 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया।

54 हजार नंबरों के पीछे छिपा बड़ा नेटवर्क

मोबाइल की जांच में व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई एक्सेल फाइलें मिलीं। पुलिस के मुताबिक सुमित ने खुलासा किया कि ये फाइलें छह अगस्त को उसकी परिचित एक महिला ने भेजी थीं। महिला कथित तौर पर उन तमिल भाषी परिवारों को निशाना बनाती थी जिनके बच्चे स्कूली शिक्षा पूरी कर उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे थे। संपर्क सूची छपवाकर महिला के सहयोगियों तक पहुंचाने और ठगी की रकम के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने का काम भी कथित तौर पर इसी नेटवर्क के तहत किया जाता था।

पुलिस टीम और आगे की कार्रवाई

यह कार्रवाई थाना प्रभारी निरीक्षक पवन यादव के नेतृत्व और सहायक पुलिस आयुक्त (ऑपरेशन) पूर्वी महावीर प्रसाद के पर्यवेक्षण में की गई। उपनिरीक्षक आजाद सिंह मलिक, हेड कांस्टेबल अनुज, हेड कांस्टेबल कुलदीप, कांस्टेबल लक्ष्मण और कांस्टेबल श्याम सुंदर की टीम ने बैंक लेनदेन सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

महिला और उसके साथियों की तलाश जारी है। पुलिस मोबाइल से मिले संदेशों लेनदेन और संपर्कों की जांच कर संभावित पीड़ितों की पहचान कर रही है। पूर्वी जिला पुलिस ने लोगों से अपील की है कि छात्रवृत्ति के नाम पर अनजान व्यक्तियों को पैसे न दें और अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

Reported by- Pankaj Rai 

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