नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से बाहर लाने के लिए उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सड़कों पर है। पार्टी के कार्यकर्ता लॉन्ग मार्च पर हैं और इस्लामाबाद में धरना देकर इमरान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने PTI को बातचीत के लिए बुलाया है, लेकिन साथ ही मार्च को तुरंत रद्द करने की शर्त भी रखी है
PTI ने अपना यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत से शुरू किया था। पार्टी का प्लान इस्लामाबाद पहुंचकर बड़ा धरना देने का है। इसे रोकने के लिए सरकार और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की पार्टी PPP के साथ PTI की पिछले दो दिनों से लगातार बैठकें चल रही थीं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
बातचीत क्यों टूटी?
सूत्रों के मुताबिक शनिवार दोपहर शुरू हुई दूसरे दौर की बैठक पूरी रात चली, लेकिन रविवार तड़के इमरान खान से मुलाकात के मुद्दे पर बात अटक गई। PTI की मांग थी कि विरोध वापस लेने से पहले उसके नेताओं को जेल में इमरान खान से मिलने दिया जाए। वहीं सरकार का कहना था कि पहले मार्च और धरना पूरी तरह खत्म हो, तभी मुलाकात पर विचार होगा।
बातचीत बेनतीजा रहने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि PTI का इरादा ही बातचीत को फेल करना था। शरीफ ने कहा कि जिन मुद्दों पर पहले सहमति बन गई थी, PTI उन्हीं पर फिर से बदलाव की मांग करने लगी।
क्या मान जाएगी सरकार?
अब शहबाज शरीफ द्वारा PTI को फिर से बातचीत का न्योता देने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार इमरान खान की रिहाई की मांग पर नरमी दिखाएगी। फिलहाल PTI का काफिला खैबर पख्तूनख्वा में ही है और माना जा रहा है कि हफ्ते के आखिर तक वह इस्लामाबाद की ओर बढ़ेगा। हालांकि टकराव से बचने के लिए पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है, क्योंकि दोनों पक्ष किसी भी तरह की हिंसा से बचना चाहते हैं।
शहबाज की चेतावनी
सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि अगर मार्च नहीं रुका तो उसे रोकने के लिए बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। प्रधानमंत्री शहबाज ने कहा कि 2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट होने से बाल-बाल बचा था और पिछले ढाई साल की मेहनत के बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। ऐसे में इस तरह के प्रदर्शन देश की आर्थिक तरक्की को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।












